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अब आटोमोबाइल बाजार में भी क्रांति

मंतोष कुमार सिंह
इतिहास के पन्नों में शीघ्र ही एक और क्रांति दर्ज हो जाएगी। जिसका नाम होगा आटोमोबाइल। टाटा मोटर्स ने लखटकिया कार नैनो का निर्माण कर इस ओर कदम भी बढा दिया है। अगर रतन टाटा जनता की इस ड्रीम कार को सही सलामत जनता के पास पहुंचाने में सफल रहे तो निश्चित तौर पर मोबाइल की तरह हर कोई कार का मालिक हो जाएगा। भारतीय सडकों पर सिर्फ कारें दौडेंगी। बाजार में कई तरह की सस्ती कारें आ जाएंगी। दुपहिया वाहन और सस्ते हो जाएंगे। नैनो की सबसे बडी खासियत कम कीमत है। यह बाजार में बिक रही बहुत सी मोटरसाइकिलों से सिर्फ थोडी सी महंगी है। कई मोटरसाइकिल तो ग्राहक के पास आकर इससे भी महंगी हो जाती है। कंपनी ने इसकी कीमत एक लाख रुपए रखी है। वैट, ट्रांसपोर्ट का खर्च, रोड टैक्स और इंश्योरेंश के बाद सडक पर इसकी कीमत एक लाख 28 हजार 500 रुपए होगी। फिर भी यह दुनिया की सबसे सस्ती कार होगी। कम कीमत के चलते उपभोक्ता को आयकर विभाग के भी चक्कर नहीं लगाने पडेंगे। कार को छोटी-छोटी मासिक किश्तों में आम आदमी भी खरीद सकता है। यह कार साल के मधय तक भारत में उपलब्धा हो जाएगी। टाटा की योजना नैनो को लैटिन अमरीका एवं अफ्रीकी देशों में निर्यात करने की भी है। 64 सीसी इंजन क्षमता वाली यह कार एक लीटर में 18 किलोमीटर का एवरेज देगी। नैनो में चार से पांच लोग आराम से बैठ सकते हैं। कार में सबसे बडी खूबी इंजन है, जिसे आगे की बजाए पीछे लगाया गया है। यह कार तीन माडलों, एक बेसिक और दो डीलक्स वर्जन में उपलब्धा होगी। डीलक्स माडल में एसी भी होगा। यूरो-4 और भारत स्पेस-3 नार्मस पर खरी उतरी यह कार फ्रांट और साइड क्रेश टेस्ट में भी सुरक्षित पाई गई है। इसकी अधिकतम रफ्तार 90 किलोमीटर है। भारतीय बाजार में उपलब्धा सबसे सस्ती कार मारुती-800 की तुलना में नैनो अंदर से 8 फीसदी छोटी है लेकिन अंदर से यह 21 फीसदी बडी है। 64 सीसी की नैनो में 33 एचपी पेट्रोल इंजन लगाया गया है। कार में यूरो-4 तकनीक का इस्तेमाल किया गया है जिसके कारण यह दोपहिया वाहनों से भी कम प्रदूषण्ा फैलाएगी। यात्रियों की सुरक्षा के लिए भी कई उपाए किए गए हैं। खुबियों के साथ-साथ इस कार में भी कई खामियां हैं। कार के टायर बेहद छोटे हैं जिसके कारण हाईवे पर चलाना मुश्किल हो सकता है। छोटी होने के कारण कार को तेज रफ्तार से चलाना खतरनाक हो सकता है। नैना में समान रखने के लिए जगह भी नहीं है। भारत के बडे शहरों में दिन-प्रतिदिन गाडियों की संख्या में बढोतरी होती जा रही है। नैनो के बाजार में आने से इनकी संख्या में और इजाफा होगा, जिसके चलते प्रदूषण और टैरफिक जाम की समस्या से दो-चार होना पडेगा। एक सर्वेक्षण के मुताबिक राजधानी दिल्ली में घनत्व के हिसाब से सबसे अधिक कारें हैं। राजधानी में प्रति 1000 की संख्या पर 85 निजी कारें हैं। राजधानी में प्रत्यके 10 वां आदमी कार का मालिक है। इस कार के बाजार में आने से सडकों पर बोझा बढेगा और जाम की समस्या पैदा होगी। भारत में इस समय करीब सात करोड दोपहिया वाहन और 1 करोड निजी कारें हैं और इनकी संख्या रोज बढ रही है। भारत में कारों की संख्या में बढोतरी होने से तेल के आयात में भी बढोतरी होगी। भारत अपनी जरूरत के लिए 75 फीसदी तेल आयात करता है और संसार का चौथा सबसे बडा तेल उपभोक्ता है ऐसे में कारों की संख्या बढने का मतलब है तेल के आयात में इजाफा। मांग बढने के चलते पेट्रोलियम पदार्थों के दामों में और वृध्दि होगी तथा महंगाई पर भी असर पडेगा। कार की एक बडी कमी इंजन का पीछे होना भी बताया जा रहा है। क्योंकि आगे इंजन होने से दुर्घटना होने पर यह सपोर्ट के रूप में काम करता है लेकिन पीछे इंजन होने से जान का अधिक खतरा होगा। दूसरी ओर नैनो ने आटोमोबइल बाजार में नई प्रतिस्पध्दर् पैदा कर दी है। अब कई कंपनियां बाजार में सस्ती कारें लाने के लिए कमर कस रही हैं। साल के अंत तक सुजुकी 660 सीसी की कार ला रही है। फोर्ड भी छोटी कार के लिए 500 मिलियन डॉलर का निवेश करने जा रही है। बजाज भी निसान और रोने के साथ मिलकर ऐसी ही योजना बना रहा है। क्रिसलर भी चीनी कंपनी के साथ मिलकर तैयारी में है। काइनेटिक इंजीनियरिंग और आयशर भी एक लाख की कार के माडल के साथ दहलीज पर खडें हैं। अभी से यह चर्चा जोरों पर है कि 'नैनो के बाजार में आने से वाहन उद्योग पर चौतरफा असर होगा। एसोचैम के अनुसार कार के बाजार में आने के बाद दोपहिया वाहन निर्माताओं को दामों में 20 फीसदी तक की कटौती करनी पडेगी। यहीं नहीं सेकंड हैंड चार पहिया बाजार के वाहनों की कीमतों में भी अच्छी खासी गिरावट दर्ज की जाएगी। अनुमान के मुताबिक सेकंड हैंड चार पहिया वाहनों की कीमतों में 35 फीसदी की गिरावट आ सकती है। यह अनुमान एसोचैम की ओर से 50 कंपनियों के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) के बीच कराएं सर्वे में सामने आए हैं। पचास फीसदी से अधिक सीईओ का मानना है कि टाटा ने दो पहिया वाहन निर्माताओं को एक चुनौती दी है। टाटा ने इन निर्माताओं के सामने उत्पाद और उसकी तकनीक में प्रयोग की दृष्टि से भी चुनौती पेश की है। पिछले वर्ष लांच हुए स्कूटर और मोपेड का रिस्पांस बाजार में अच्छा नहीं रहा, इंजन की क्षमता बढाने के लिए अगर कोई प्रयोग किया जाता है तो लागत में वृध्दि होती है। नवंबर 2006 से अब तक दो पहिया वाहनों का बाजार 25 फीसदी तक सिकुडा है। जहां नवंबर 2006 में 19 लाख वाहनों की बिक्री हुई थी वहीं 2007 में सिर्फ 15।5 लाख वाहन ही बिक पाए। इसे अगर संकेत माने तो लखटकिया कार के बाजार में आने बाद उपभोक्ताओं के पास चार पहिया वाहनों में ज्यादा विकल्प मौजूद होंगे ऐसे में कार की कीमत अहम भूमिका अदा करेगी और दो पहिया वाहनों की बिक्री प्रभावित होगी। आठ फीसदी सीईओ ने माना कि आय बढने से ग्राहक ज्यादा खर्च करते हैं। जबकि 70 फीसदी लोगों ने माना कि टाटा की नैनो कार अगले तीन से चार वर्ष में बाजार के 50 फीसदी हिस्से पर कब्जा करने में सक्षम है। साथ ही मैट्रो और बडे शहरों के कार बाजार के आकार में परिवर्तन होगा। 75 फीसदी सीईओ मानते हैं कि टाटा की लखटकिया कार से बैंक लोन लेने वालों की संख्या में भी 25 फीसदी की बढोतरी आ जाएगी। वर्तमान में चार पहिया वाहनों के लिए लोन लेने वालों की संख्या में दस फीसदी की कमी दर्ज की गई है जबकि इस दौरान निर्माण और रियल एस्टेट के क्षेत्र में 26 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है। जर्मन की रिसर्च कंपनी सीएमएस वर्ल्ड वाइड का कहना है कि भविष्य में भारतीय सडकों पर नैनो का ही राज होगा। रिपोर्ट के अनुसार 2013 तक लखटकिया कार के जरिए टाटा मोटर्स देश में कम भार वाले वाहनों का उत्पादन करने के मामले में शिखर पर पहुंच जाएगा। अगले पांच सालों में टाटा मोटर्स हर साल 12 लाख छोटे वाहनों का उत्पादन करेगा, जिसमें 'नैनो की हिस्सेदारी 50 फीसदी होगी। 2013 तक नैनो छह लाख गाडियों की बिक्री का कीर्तिमान रच सकती है। टाटा मोटर्स ने निश्चित तौर पर कई कंपनियों के सामने नई चुनौती पैदा कर दी है। अन्य आटोमोबाइल कंपनियों को बाजार में बने रहने के लिए छोटी तथा सस्ती कारों का निर्माण् करना पडेगा, जिससे प्रतिस्पध्र्दा और बढेगी। कुल मिलकर ग्रहकों को ही फायदा होगा।

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