Total Pageviews

Thursday

बाजार के चंगुल में क्रिकेट

  • मंतोष कुमार सिंह
परिवर्तन प्रकृति का सत्य नियम है। समय-समय पर हर क्षेत्र में परविर्तन होते रहे हैं, लेकिन किसी ने सपने में भी नहीं सोचा होगा कि क्रिकेट में इस तरह का परिवर्तन देखने को मिलेगा कि वह पूरी तरह बाजार के चंगुल में फंस जाएगा। खूले बाजार में क्रिकेटरों की नीलामी होगी। खिलाडियों की प्रतिभा को सरेआम रौंदा जाएगा। धानबाकुरों के मेले में जानवरों की तरह बेचा जाएगा। ऐसे लोग उन्हें खरीदेंगे जिनका क्रिकेट से दूर-दूर तक का रिश्ता नहीं है। इससे स्पष्ट है कि दुनिया के सबसे लोकप्रिय खेल क्रिकेट को बाजार ने अगवा कर लिया है। यह क्रिकेट और उसके प्रशंसकों के लिए अच्छा नहीं है। इस मंडी से सिर्फ टीम के फ्रेंचाइजी लेने वालों का ही फायदा होगा। इससे न तो क्रिकेट की तरक्की होगी और न ही खिलाडियों की। हां क्रिकेटर मालामाल जरूर हो जाएंगे, लेकिन उनकी प्रतिभा का क्या होगा यह आने वाला समय ही बताएगा।
दुनिया के सबसे रईस क्रिकेट बोर्ड बीसीसीआई के इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) के लिए पिछले दिनों मुंबई में मंडी लगी थी। इस मंडी में 60 क्रिकेटर अगले तीन सालों के लिए बिक गए। क्रिकेट के बाजार में खरीदार कोई और नहीं मुकेश अंबानी (मुंबई), विजय माल्या (बेंगलूर), शाहरुख खान (कोलकाता) और प्रीटि जिंटा (मोहाली) थे। इनके साथ डेक्कन क्रॉनिकल (हैदराबाद), इंडिया सीमेंट (चेन्नई), जीएमआर (दिल्ली) और इमार्जिंग मीडिया (जयपुर) ने ताल ठोकी। आईपीएल की फ्रेंचाइजी इन आठ टीमों ने खरीदी है। ट्वेंटी-20 टूर्नामेंट के लिए खिलाडियों की नीलामी में भारतीय वनडे टीम के कप्तान महेंद्र सिंह धोनी पर लक्ष्मी की सबसे ज्यादा बारिश हुई। धोनी को चेन्नई ने 6 करोड रुपए में खरीद लिया। भारत के तूफानी गेंदबाज ईशांत शर्मा गेंदबाजों की श्रेणी में सबसे महंगे रहे। उन्हें 3.8 करोड में शाहरुख खान ने अपनी टीम में ले लिया। खिलाडियों की नीलामी में भी शाहरुख खान किंग सबित हुए। उन्होंने अन्य टीमों को पटखनी दे दी। उनकी कोलकाता टीम में पाकिस्तान के रावलपिंडी एक्सप्रेस शोएब अख्तर, आस्ट्रेलिया के कप्तान रिकी पोंटिंग, न्यूजीलैंड के विकेट कीपर मैक्कुलम, वेस्टइंडीज के ताबडतोड बल्लेबाज क्रिस गेल और भारत के गेंदबाज ईशांत शर्मा आए। धोनी के बाद दूसरी सबसे बडी बोली एंड्रयू सायमंड्स के नाम रही। उन्हें 5.4 करोड रुपए की कीमत पर हैदराबाद ने अपनी झोली में डाल लिया। 18 अप्रैल से एक जून तक होने वाले आईपीएल ट्वेंटी-20 टूर्नामेंट में 44 दिन के अंदर 59 मैच खेले जाएंगे और जीतने वाली टीम को 30 लाख अमरीकी डॉलर की पुरस्कार राशि दी जाएगी। यह धानराशि पिछले साल हुए पहले ट्वेंटी-20 क्रिकेट विश्व कप में जीतने वाली भारतीय टीम को मिले इनाम से 11 लाख डॉलर अधिक है। कुल मिलकर चौतरफा पैसा ही पैसा।
आने वाले समय में बीसीसीआई का लीग क्रिकेट जगत में कई बदलाव ला सकता है। क्रिकेट के जानकारों का कहना है कि ट्वेंटी-20 स्पधरओं के चलते टेस्ट मैचों और वनडे की लोकप्रियता में कमी आएगी। लोगों का फटाफट क्रिकेट की तरफ रूझान ज्यादा रहेगा। इंडियन प्रीमियर क्रिकेट लीग की तर्ज पर बाकी देशों में भी ऐसे ही लीग की शुरुआत हो जाएगी। खिलाडी अंतरराष्ट्रीय मैचों की तुलना में लीग पर ज्यादा धयान देंगे, क्योंकि पैसे की खातिर क्रिकेटर देश के बजाय क्रिकेट लीग को तरजीह देने लगेंगे। इससे क्रिकेट की नहीं खिलाडियों की भलाई होगी। खेल पर बजारू ताकतें हावी हो जाएंगी। बीसीसीआई द्वारा सार्वजनिक रूप से क्रिकेटरों की नीलामी की चौतरफा आलोचना हो रही है। बोर्ड का एक मात्र धयेय पैसा कमाना है। बोर्ड धान उगाहने की एक संस्था बन गया है। क्रिकेट इतिहास की शायद यह पहली घटना है जब खिलाडियों का चयन चयनकर्ताओं ने नहीं पैसे वालो ने किया। अब यह आशंका जताई जा रही है कि कहीं क्रिकेट अक्षुण्य न हो जाए।
एक तरफ भारत में क्रिकेट पर धान लुटाया जा रहा है तो दूसरी तरफ कई खेल अपने अस्तित्व की लडाई लड रहे हैं। क्रिकेट के कारण हाकी, फुटबाल, कुश्ती, तैराकी, कबवी, बैडमिंटन और तीरंदाजी जैसे पारंपरिक खेल पिछड गए हैं। क्रिकेट के अलावा बाकी खेल और खिलाडी उपेक्षा के शिकार हैं। हाल ही में गोवा में आयोजित राष्ट्रीय बैडमिंटन शिविर शटलकॉक उपलब्धा न होने के कारण् रद्द करना पडा। भारतीय बैडमिंटन संघ ने शिविर को रद्द कर खिलाडियों को घर जाने के लिए कह दिया। यह शिविर थॉमस और उबेर कप क्वालिफायर्स की तैयारी के सिलसिले में लगाया जाना था, लेकिन यह शिविर उपेक्षा का शिकार हो गया। यह पहला मौका नहीं है जब क्रिकेट के अलावा दूसरा कोई खेल उपेक्षा का शिकार हुआ हो। कई बार हाकी के साथ भी सरकार, खेल संघ और मीडिया ने सौतेला व्यवहार किया है। पिछले दिनों ट्वेंटी-20 वर्ल्ड कप विजेता टीम इंडिया को सिर पर बिठा लिया गया लेकिन एशिया कप जितने वाली हाकी टीम को दोयम दर्जे पर रखा गया। हाकी टीम ने भी एशिया कप जैसा बडा टूर्नामेंट जीता था लेकिन खिलाडियों को किसी ने पूछा तक नहीं। उनके साथ लावारिसों की तरह व्यवहार किया गया। नौ सितंबर-2007 को हाकी टीम ने अपने से मजबूत दक्षिण कोरिया को 7-2 के बडे अंतर से रौंदकर खिताब पर कब्जा किया था लेकिन खिलाडियों को पर्याप्त सम्मान और पुरस्कार नहीं दिया गया, जिसके कारण उन्हें हडताल करने की धामकी देनी पडी। इतना होने के बाद केंद्र सरकार की कान में जूं रेंगी। धामकी के बाद सरकार और नागरिक उव्यन मंत्रालय ने उनकी सुधा ली और इनामों व प्रमोशन की घोषणा कर दी। अगर क्रिकेट की तरह हॉकी खिलाडियों का भी ख्याल रखा जाता तो शायद हमारी टीम दुनिया में नंबर-वन होती। दूसरी ओर आईपीएल से प्रायोजकों के छिनने का भी खतरा पैदा हो गया है। स्पांसर आईपीएल पर ज्यादा पैसा लगाना पसंद करेंगे, क्योंकि इससे उन्हें ज्यादा दर्शक मिल जाएंगे। इसका असर ओलंपिक खेलों की तैयारियों पर पड सकता है। बीजिंग में इसी साल अगस्त में होने वाले ओलंपिक खेलों की तैयारियां जोरों पर हैं। ऐसी आशंका जताई जा रही है कि ओलंपिक खेलों के लिए पर्याप्त धान और सुविधाएं न मिली तो इस बार भी भारत पदक से चुक जाएगा। जनसंख्या में हम विश्व में दूसरे स्थान पर हैं, लेकिन ओलंपिक खेलों में एक मेडल के लिए तरस जाते हैं। कहीं क्रिकेट पर हो रही धानवर्षा से अन्य खेल विलुप्त न हो जाएं। क्रिकेट में बेशुमार पैसा, ग्लैमर आदि को देखकर कौन युवा दूसरे खेलों की ओर रुख करेगा। मीडिया में भी क्रिकेट को तरजीह दी जा रही है। हमें क्रिकेट के अलावा दूसरे खेलों को भी प्रोत्साहित करना चाहिए, ताकि खिलाडी विश्व पटल पर धामाकेदार उपस्थिति दर्ज करा सकें।

No comments: