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हर भारतीय सात हजार रुपये का कर्जदार

देश का हर नागरिक अब लगभग 7 हजार 2 सौ 18 रुपये का कर्जदार है। वित्त मंत्रालय द्वारा 31 मार्च को जारी आंकड़ों के मुताबिक वित्त वर्ष 2007-08 के पहले नौ महीनों में भारत पर विदेशी ऋण 31.8 अरब डालर बढ़कर 201.4 अरब डालर के स्तर पर पहुंच गया है। इस लिहाज से 1.10 अरब की आबादी वाले भारत में हर नागरिक पर 7 हजार 2 सौ 18 रुपये की उधारी है। देश पर कर्ज बढ़ाने में कंपनियों द्वारा विदेश से जुटाए गए ऋणों और रुपये की खासी मजबूती ने अहम भूमिका निभाई है। मार्च 2007 तक विदेशी कर्ज 169.7 अरब डालर था। 2007-08 की तीसरी तिमाही के दौरान यह 10.3 अरब डालर और बढ़ गया। इसी तरह रुपये की मजबूती के चलते अप्रैल-दिसंबर 2007 के दौरान विदेशी ऋण छह अरब डालर तक बढ़ गया। तीसरी तिमाही में दीर्घकालिक ऋण भी 6.3 अरब डालर बढ़कर 166.2 अरब डालर तक पहुंच गया। पकालिकालों भी चार अरब डालर बढ़कर 35.2 अरब डालर हो गया।

2 comments:

मंतोष कुमार सिंह said...

bazarvad ke is daur me jabki 'india' me karz se aadmi ki sakh tay hone lagi hai, is khabar ko sakaratmak arth me hi lena chahiye. kya yeh 'bharat' me garibi rekha se niche rahne wale un logo ke liye sir uncha karne vali bat nahi hai ki un par 7218 ru. ka karz hai. chitamram ji, badhai ho.

sourabh said...

bazarvad ke is daur me jabki 'india' me karz se aadmi ki sakh tay hone lagi hai, is khabar ko sakaratmak arth me hi lena chahiye. kya yeh 'bharat' me garibi rekha se niche rahne wale un logo ke liye sir uncha karne vali bat nahi hai ki un par 7218 ru. ka karz hai. chitamram ji, badhai ho.