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2030 तक लुप्त हो जाएगी गंगा !

लोकसभा में सोमवार को 2030 तक गंगा के विलुप्त होने की आशंका पर चिंता जताई गई और इसे बचाने के लिए सरकार से गंगा प्राधिकरण बनाने की मांग की गई। शून्यकाल में सपा के रेवती रमण सिंह ने यह मामला उठाया। उन्होंने कहा कि ग्लोबल वार्मिग के चलते ग्लेशियरों के पिघलने का अध्ययन कर रहे वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि गंगा 2030 तक विलुप्त हो जाएगी। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिकों के अनुसार गंगा जिन ग्लेशियरों से निकलती है वह 30 किलोमीटर तक पहले ही गल चुके हैं और 30 मीटर प्रति वर्ष के हिसाब से इनका गलना जारी है। अगर ग्लेशियर गलने की यही रफ्तार रही, तो गंगा का बचना मुश्किल हो जाएगा। सिंह ने कहा कि गंगा केवल नदी नहीं है, बल्कि भारत की संस्कृति और सभ्यता का अभिन्न अंग है। सरकार को इसकी रक्षा के उपाय खोजने के लिए गंगा प्राधिकरण का तुरंत गठन करना चाहिए। उन्होंने कहा कि शीघ्र ही इलाहाबाद में गंगा पर मेला लगने वाला है और सरकार को चाहिए कि वह बांधों द्वारा रोके गए पानी को नदी में छोड़े। इस पर अध्यक्ष सोमनाथ चटर्जी ने कहा कि मेले में गंगा को कितना गंदा किया जाता है, उसके बारे में क्या कहना है।

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