Total Pageviews

Tuesday

अंदर-बाहर के खतरे

गृहमंत्रालय की यह चिंता पर्याप्त नहीं कि सीमा पार अर्थात पाकिस्तान और उसके कब्जे वाले कश्मीर में आतंकियों के शिविर न केवल पहले की तरह कायम हैं, बल्कि उन्हें वहां विधिवत प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है। गृहमंत्रालय का ताजा आकलन राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार एमके नारायणन के हाल के उस वक्तव्य की पुष्टि करता है जिसमें उन्होंने लश्कर और जैश सरीखे खूंखार आतंकी संगठनों को पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई की मदद जारी रहने के प्रति देश को आगाह किया था। उनका यह भी मानना था कि आईएसआई के भारत विरोधी रुख में कोई परिवर्तन नहीं आया है। यदि वास्तव में ऐसा है और जिस पर यकीन न करने का कोई कारण भी नहीं तो फिर सीमा पार की हर प्रकार की गतिविधियों से सतर्क-सचेत रहने में ही भलाई है। सच तो यह है कि कोशिश इस बात की होनी चाहिए कि सीमा पार का आतंकी ढांचा छिन्न-भिन्न हो। यदि सीमा पार से घुसपैठ नहीं हो रही और जम्मू-कश्मीर के हालात अपेक्षाकृत शांत हैं तो इसका यह अर्थ नहीं कि अमन-चैन की बहाली हो चुकी है। सीमा पार जो आतंकी आईएसआई के संरक्षण में प्रशिक्षित हो रहे हैं वे कभी भी भारत के लिए खतरा बन सकते हैं। आश्चर्य नहीं कि पिछले कुछ समय से वे महज इसलिए शांत और शिथिल पड़े हों, क्योंकि पाकिस्तान के अंदरूनी हालात उन्हें देश के बाहर सक्रिय होने की इजाजत न दे रहे हों। वस्तुस्थिति जो भी हो, इसकी अनदेखी नहीं की जा सकती कि पाकिस्तानी राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ ने वचन देने के बावजूद अपने यहां के आतंकी ढांचे को नष्ट करने में दिलचस्पी नहीं दिखाई। इसका कारण उनकी अनिच्छा भी हो सकती है और आईएसआई का दबाव भी। इस संदर्भ में यह भी ध्यान रहे कि भारत सरकार ने परवेज मुशर्रफ के समक्ष आईएसआई के भारत विरोधी षड्यंत्रों को लेकर कभी कोई सवाल नहीं उठाए। भले ही पाकिस्तान में नई सरकार पदारूढ़ हो गई हो और मुशर्रफ कमजोर नजर आने लगे हों, लेकिन फिलहाल भारत रिश्तों में सुधार के प्रति आशान्वित होने के अतिरिक्त और कुछ करने की स्थिति में नहीं।
यह मानना सही नहीं होगा कि आईएसआई ने भारत को अस्थिर करने की अपनी रणनीति का परित्याग कर दिया है। जब-तब ऐसे सबूत सामने आते रहते हैं कि आईएसआई भारत को कमजोर करने के लिए हर संभव उपाय कर रही है।
पिछले कुछ समय से यदि नेपाल और बांग्लादेश में भारत विरोधी तत्वों ने अपनी जड़ें जमा ली हैं तो इसका एक बड़ा कारण इन देशों में आईएसआई की सक्रियता है। बांग्लादेश में सक्रिय भारत विरोधी तत्व तो उतने ही खतरनाक हो गए हैं जितने कि पाकिस्तान के आतंकी संगठन। आखिर क्या कारण है कि पिछले कुछ समय से बांग्लादेश आधारित आतंकी संगठन हुजी का नाम बार-बार सामने आने लगा है? नि:संदेह समस्या केवल सीमा पार से ही नहीं है। सीमा के अंदर भी सब कुछ ठीक नहीं और इसका ताजा प्रमाण है मध्यप्रदेश में प्रतिबंधित संगठन सिमी के सरगनाओं की गिरफ्तारी। यह गिरफ्तारी राहत प्रदान करने के साथ-साथ चिंतित करने वाली भी है, क्योंकि जो जानकारी सामने आई है वह देश विरोधी तत्वों के दुस्साहस को ही बयान करती है। स्पष्ट है कि भारत को अंदर-बाहर के खतरों से निपटने की तैयारी करने की जरूरत है।
संपादकीय- जागरण

No comments: