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बालू में दफनाया गया मासूम जिन्दा बचा


सीतामढ़ी। 'जाको राखे साईयां मार सके न कोय' यह कहावत शनिवार को जिले के परिहार थाना क्षेत्र के नरफोरवा गांव में उस समय चरितार्थ हुई, जब एक मासूम को गांव के ही एक युवक द्वारा अधमरा करने के बाद बालू में दफना दिया गया। मगर ईश्वर की कृपा कहिये कि कुछ लोगों ने इस हैवानियत को देख लिया और बच्चे को बालू से निकालकर सदर अस्पताल में भर्ती कराया है। बच्चा सही-सलामत है। उसके शरीर पर गहरे जख्म हैवानियत की कहानी बयां कर रही है। परिहार पुलिस ने सदर अस्पताल पहुंचकर मासूम के पिता के बयान पर मामला दर्ज कर कार्रवाई शुरू कर दी है।
जानकारी के अनुसार परिहार थाना क्षेत्र के नरफोरवा गांव निवासी शिवजी शर्मा के पांच वर्षीय पुत्र राहुल को ग्रामीण लक्ष्मण शर्मा के 17 वर्षीय पुत्र सरोज घर से बहला-फुसलाकर शनिवार को सरेह में ले गया और सुनसान जगह पर अधमरा करने के बाद मृत समझकर बालू में दफन कर दिया। इसी बीच, ग्रामीण बुद्धू मांझी की पत्नी व सरदलपट्टी निवासी जतन राम घर जाने के लिए सरेह से लौट रहे थे कि अचानक उनलोगों की नजर सरोज पर पड़ी। घटना को देख दोनों के शोर मचाने पर आसपास के लोग इकट्ठा हो गये। लोगों ने इसकी सूचना शिवजी शर्मा को दी। उसके बाद आनन-फानन में बच्चा इलाज के लिए सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया। चिकित्सकों के मुताबिक बच्चा सही-सलामत है।
उधर, राहुल की मां के अनुसार बच्चे के गले व शरीर के अलावा बांयी आंख पर जख्म हैं। चिकित्सकों का कहना है कि अगर बच्चे को समय पर नहीं बचाया जाता तो उसकी जान जा सकती थी। राहुल के पिता ने बताया कि 10 दिन पूर्व सरोज उनके घर आकर टंगे हुए कमीज से पैसा व डायरी निकाल रहा था, लेकिन वह पकड़ा गया और डांट-फटकार कर उसे छोड़ दिया गया। दो-तीन दिन बाद सरोज ने शिवजी शर्मा के बड़े पुत्र राजा से कहा कि तुम्हारे बाप ने हमको डांटा हैं। मैं तुम्हारे भाई को जान से मार दूंगा। इसी आक्रोश में शनिवार को सरोज ने शिवजी के पांच वर्षीय पुत्र राहुल को अधमरा कर बालू में दफना दिया, लेकिन वह बाल-बाल बच गया।

साभारःजागरण

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