Thursday

ओबीसी आरक्षण को मंजूरी

उच्चतम न्यायालय ने एक अहम फैसले में आज केन्द्रीय उच्च शिक्षण संस्थानों में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के लिए 27 प्रतिशत आरक्षण को मंजूरी दे दी, लेकिन इस वर्ग की क्रीमीलेयर को आरक्षण के दायरे से बाहर रखने के निर्देश दिए।मुख्य न्यायाधीश केजी बालाकृष्णन की अध्यक्षता वाली पाँच सदस्यीय संविधान पीठ ने ओबीसी को 27 प्रतिशत आरक्षण दिलाने वाले 2006 के केन्द्रीय शिक्षण संस्थान (प्रवेश में आरक्षण) कानून को चुनौती देने वाली कई याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए लम्बी बहस के बाद उक्त कानून को वैध ठहराया।लेकिन साथ ही यह भी निर्देश दिया कि यदि आरक्षण का आधार जाति है तो इस वर्ग के सुविधा-सम्पन्न यानी क्रीमीलेयर को आरक्षण के दायरे से बाहर रखा जाए। पीठ ने चार-एक के बहुमत से उक्त कानून को वैध ठहराया। न्यायमूर्ति दलबीर भंडारी ने इससे असहमति जताई।

1 comment:

Suresh Chiplunkar said...

मुझे नहीं लगता कि गरीब सवर्णों के बारे में कोई सोचेगा। इस देश में नीतियों के बारे तभी सोचा जाता है जब वह प्रजाति एक "वोट बैंक" हो। सरकारों का अगला कदम निजी कम्पनियों में आरक्षण होगा… इसलिये घुट-घुटकर जीने और अपने से कम प्रतिभाशाली को आगे बढ़ते देखने के अलावा कोई और चारा नहीं है। यदि थोड़ा पैसा और हिम्मत हो तो ब्राह्मणों को भारत छोड़ने में ही भलाई है… आने वाला भविष्य बहुत अंधकारमय है…