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सड़क हादसों की अंतहीन दौड़

देशभर से लगभग रोज दर्जनों लोगों की सड़क दुर्घटनाओं में मारे जाने की खबरें आती रहती हैं। अफसोस की बात यह है कि मीडिया में इन खबरों का महत्व तब तक नहीं होता जब तक मृतकों में कोई विशिष्ट न हो या मृतकों की संख्या बहुत ज्यादा न हो। बुधवार को बड़ौदा में हुई बस दुर्घटना में मासूम बच्चों की मौत दोनों ही पैमानों पर एक बड़ी और दुखद खबर है। यह एक संकेत भी है कि अगला शिकार कोई हमारा अपना भी हो सकता है।
सड़क दुर्घटनाओं के कारणों में प्रमुख है गाड़ी चलाने वालों की अकुशलता और असावधानी। सड़कों के हालात को भी कुछ हद तक जिम्मेदार ठहराया जा सकता है, पर जिस आसानी से अपात्र लोग भी ड्राइविंग लाइसेंस बनाकर स्टाइलिश मोटर साइकिल, कार चलाते हैं उससे तो वह अपनी जिंदगी खतरे में डालते ही हैं। इसी तरह गलत तरीके से बने लाइसेंस लेकर जब कोई बस या ट्रक चलाता है तो वह औरों की जिंदगी से खिलवाड़ करता है।
जिस तरह देश में सड़कों की स्थिति में सुधार हो रहा है, जिस तरह आसान ऋण लेकर लोग कार, मोटर साइकिल और बड़े वाहन खरीद रहे हैं, क्या उसी तरह से ड्राइविंग लाइसेंस और सड़क सुरक्षा को लेकर प्रयास किए गए? क्या ऐसा लगता है कि प्रशासन तंत्र में किसी को भी सड़क सुरक्षा के प्रति कोई चिंता है? लगता है हर दुर्घटना के बाद जांच करने और मुआवजा देने के अलावा प्रशासन का कोई कर्तव्य रह ही नहीं गया है।
एक और चिंताजनक पहलू है ऐसी दुर्घटनाओं के बाद पुलिस और अन्य एजेंसियों द्वारा घायलों को चिकित्सा दिलाने की बजाय कानूनी दांवपेंच में मूल्यवान समय नष्ट करना। कितने ही मामले ऐसे आते हैं कि दुर्घटना में घायल व्यक्ति सड़क पर पड़ा तड़पता रहा और पुलिस, थाने के सीमा विवाद में उलझी रही।
क्या वे पुलिस वाले तब भी यही करते जब उनके अपने परिवार का कोई दुर्घटनाग्रस्त हुआ होता? अफसोस तो यही है कि शासन और प्रशासन में शामिल लोगों के लिए उस तंत्र के बाहर लोग शायद मायने ही नहीं रखते हैं। वे अपने आप को ‘सरकार’ समझते हैं और बाकी को ‘पब्लिक।’ अगली किसी भी दुर्घटना में मृतक या घायलों में हमारे अपने भी हो सकते हैं। उस समय अपनी पीड़ा की कल्पना मात्र भी असहनीय है। देश भर में यदि ड्राइविंग लाइसेंस बनने से लेकर ड्राइविंग के तरीके सुधारने तक और सड़क दुर्घटनाओं में तुरंत सहायता की सुविधा प्रदान नहीं की गई तो हम अगली दुर्घटना पर फिर दुख जताने के अलावा कुछ नहीं कर पाएंगे।
संपादकीय-भास्कर

1 comment:

rakhshanda said...

really ,,aapne sahi likha hai..