Sunday

कोख की पीड़ा पर कैंची

  • नीलिमा सुखीजा अरोड़

जयपुर. पांच माह पहले मां बनी 35 साल की सुनीता शर्मा को प्रसव के बाद से ही लगातार कमर दर्द की शिकायत है। सुनीता को प्रसव के समय डॉक्टर ने कहा कि उनकी उम्र तीस पार है तो वे साधारण डिलीवरी का जोखिम नहीं उठाना चाहते। उनका सीजेरियन किया गया। वे कहती हैं कि जरूरत न होने पर भी ऑपरेशन किया गया, पहले दो बच्चे साधारण प्रसव से हुए थे।
सुनीता ऐसी अकेली महिला नहीं है, जिन्हें जरूरत न होते हुए भी सीजेरियन किया गया। प्रदेश के निजी अस्पतालों में होने वाले प्रसव में से 53 प्रतिशत प्रसव सर्जरी (सीजेरियन) से हो रहे हैं जबकि सरकारी अस्पतालों में यह आंकड़ा 25 फीसदी है। यह देश-दुनिया के आंकड़ों से कहीं ज्यादा है। यह चौंकाने वाले तथ्य तब सामने आए जब ‘भास्कर’ ने प्रदेश के प्रमुख सरकारी अस्पतालों व निजी अस्पतालों में यह पड़ताल की।
सीजेरियन ज्यादा होने के पीछे डॉक्टरों की खतरा न लेने की प्रवृत्ति व पैसा कमाने की इच्छा भी बड़े कारण हैं। साधारण प्रसव पर जहां खर्च महज 2 हजार रुपए आता है वहीं सीजेरियन प्रसव के दौरान यह खर्च 12 हजार रुपए से लेकर 25 हजार रुपए तक आता है। उच्च सुविधाओं वाले कुछ निजी अस्पताल इससे अधिक भी चार्ज कर सकते हैं।


पूरी दुनिया की स्थिति
विश्व स्वास्थ्य संगठन के एक रिपोर्ट के अनुसार इस समय पूरी दुनिया में कुल प्रसव में से औसतन 15 फीसदी प्रसव ही सीजेरियन हो रहे हैं। जबकि राजस्थान में यह दर पूरी दुनिया की तुलना में कहीं अधिक लगभग 35 प्रतिशत आंकी गई है। कैनेडियन मेडिकल एसोसिएशन जनरल में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार सीजेरियन करवाने वाली प्रति 1000 महिलाओं में से 27 महिलाएं गंभीर बीमारियों का शिकार होती हैं। इसकी तुलना में साधारण प्रसव में गंभीर रूप से बीमार होने वाली महिलाओं की संख्या केवल नौ प्रति एक हजार है।


ये हैं खतरे
शिशु जब परंपरागत मार्ग से नहीं गुजरता तो उसके फेफड़ों का पानी पूरी तरह से नहीं निकलता, ऐसे में कई मामलों में बच्चे को सांस लेने में तकलीफ हो सकती है। कुछ बच्चों की सांस ज्यादा तेज चलने लगती है इसे ट्रान्सियन्ट टैक्पिनिया ऑफ न्यूबॉर्न भी कहते हैं। साधारण डिलीवरी से होने वाले बच्चों में सिर का कोन भी सही तरीके से बनता है।
सीजेरियन भी एक सर्जरी(शल्य क्रिया) ही है, इसमें भी दूसरी सर्जरी की तरह ही खतरा होता है। एनेस्थेटिक या सर्जकिल कॉम्पलिकेशन या डॉक्टर की किसी लापरवाही की वजह से अथवा मां या बच्चे की बॉडी में रिएक्शन से कोई खतरा हो सकता है। जयपुर स्थित होली फैमिली अस्पताल से जुड़ी स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ। नीतू आहलुवालिया कहती हैं कि कुदरती प्रसव ऑप्रेशन के प्रसव से बेहतर है। जिन केसेज में मां या बच्चे की जान को खतरा होता है उन्हीं में सीजेरियन किया जाता है।

सौजन्य-भास्कर

No comments: