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लड़की को अर्धनग्न करने पर उबल पड़ा रायपुर


रायपुर को सलाम॥ यकीन हो गया है कि यहां जिन्दा लोग भी रहते हैं। दो दिन पहले ओसीएम चौक (नलघर) के पास से एक युवती को पीटने व उसे अर्धनग्न हालात में सरेराह दौडऩे के लिए मजबूर करने के मामले में तीन अप्रैल को राजधानी के लोग उबल पड़े। सबने चरमराती कानून व्यवस्था की स्थिति को लेकर थू.. थू किया। मामले की गंभीरता को देखते हुए महिला और मानवाधिकार आयोग ने भी पुलिस से जवाब मांगा है। महिला आयोग ने प्रदेश के पुलिस महानिदेशक को पत्र लिखकर कार्रवाई करने की अनुशंसा की है जबकि मानवाधिकार आयोग ने घटना के दौरान पुलिस के मूक बने रहने की घटना को अशोभनीय मानते हुए जवाब-तलब किया है। इधर देश के कुछ न्यूज चैनलों में खबर के प्रसारण और हरिभूमि में खबर के प्रकाशन के बाद प्रदेशभर में प्रदर्शन का सिलसिला शुरू हो गया है। यह सूचना भी मिली है मामले की जांच पड़ताल के लिए राष्ट्रीय महिला आयोग की टीम जल्द ही रायपुर पहुंचने वाली है। ओसीएम चौक की घटना को कतिपय लोगों ने पहले-पहल जितना आसान बताने की कोशिश की है दरअसल यह मामला उतना आसान नहीं है। यह मामला सिर्फ जिस्मफरोशी और उससे चिढ़े बैठे लोगों की कथित स्वाभाविक प्रतिक्रिया का भी नहीं है। यह घटना बताती है कि वे दलाल जो हर व्यवस्था में एक घुन की तरह होते हैं वे चाहें तो पुलिस-प्रशासन और भी न जाने किन-किन के साथ बेहद अच्छे ढंग से खेल लेते हैं। यह घटना शहर की सम्मानजनक संस्कृति से खिलवाड़ की भी है। जिस शहर में एक औरत को (ठीक नवरात्रि के पहले) शर्मसार होने के लिए मजबूर किया जाता हो क्या वाकई उस शहर को देश-दुनिया के नक्शे पर कोई इज्जत के नजरिए से देखना पंसद करेगा? एक लड़की को नग्न दौड़ाने की जो घटना राजधानी में हुई है वैसी घटना तो शायद देश के नामी रेडलाइट इलाकों में भी नहीं हुई होगी। मामले का सबसे खतरनाक पहलू देखिए कि पुलिस के पास लड़की के साथ मारपीट करने और उसे दौड़ाने वाले सारे आरोपियों के नाम, चेहरे, पते मौजूद हैं, यहां तक कुछ आरोपी तो उनके थाने के आसपास ही रहते हैं बावजूद इसके वह उन्हें गिरफ्तार नहीं कर सकी हैं। आरोपी आज भी शहर में खुलेआम घूमते हुए देखे गए हैं। अलबत्ता पुलिस ने आज लड़की के साथ-साथ उसकी भाभी और उसकी बहन को न्यायालय में पेश किया था। माननीय न्यायाधीश ने कानून-सम्मत तरीके से सभी को जमानत भी दे दिया है लेकिन किसी सक्षम जमानतदार के खड़े न होने की वजह से उन्हें जेल जाना पड़ा है। जेल की हवा उस दुधमुंहे को भी खानी पड़ी है जो दो दिन पहले हुई घटना में अपनी मां से लिपटकर रो रहा था।

साभार-हरिभूमि

4 comments:

आशीष said...

sचलिए यह तो तय हुआ कि रायपुर में अभी भी जिंदा और सभ्‍य लोग रहते हैं

Sanjeet Tripathi said...

इस बात के लिए मेरी बधाई स्वीकारें की पिछले कुछ महीने से हरिभूमि का रंग रूप ही नही बल्कि स्तर भी बहुत अच्छा हो गया है!!!
बस एक "एफ़ आई आर" पेज पता नही क्यों मुझे पसंद नही आता!!

वैसे राजकुमार सोनी जी हैं अभी?

DEO PRAKASH CHOUDHARY said...

तीन तारीख को स्टार न्यूज के "सनसनी" में मैंने दर्शकों से तीन सवाल पूछे थे..क्या रायपुर मुर्दों का शहर है? क्या रायपुर दरिंदों का शहर है? क्या रायपुर शैतानों का शहर है?
आपकी इस जानकारी से चलिए थोड़ी सी उम्मीद तो बढ़ी है कि शहर अभी मरा नहीं....शुक्रिया।

सुजाता said...

चलिये कुछ सांस आयी । लेकिन जो हो चुका उसकी भरपाई किसी भे तरह नही हो सकेगी ?
अपनी शर्मिन्दगे और अभी भी कुछों के मन में बसी दरिन्दगी का क्या कर पायेंगे !!
इस पोस्ट का भी लिंक दे रहे हैं चोखेर बाली पर ।
धन्यवाद ! पूरे मसले पर नज़र रखने के लिए और रपट पेश करने के लिए ।