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शर्मिला ने दी मर्दो को टक्कर

जज्बा मर्दो से बराबरी का और जरिया अतिरिक्त कमाई का। इन दो बातों ने शर्मिला को नारियल के पेड़ों पर दनादन चढ़ना सिखा दिया। यह काम अब तक सिर्फ मर्दो के बूते की बात माना जाता था। नारियल का पेड़ कितना भी ऊंचा क्यों न हो, 37 वर्षीय शर्मिला पलक झपकते चढ़ जाती है। इससे पास-पड़ोस के लोगों को भी काफी राहत है, क्योंकि युवक अब इस परंपरागत काम से खुद को दूर ही रख रहे हैं। केरास यानी नारियल की धरती केरल में नारियल के पेड़ पर चढ़ने वाले मजदूरों की अत्यधिक कमी है। समीपस्थ जिला कासारगोड जिले की रहने वाली शर्मिला पार्ट टाइम सरकारी नौकरी करती है। बाकी समय में नारियल तोड़ती है। वह प्रतिदिन 10-15 पेड़ों पर चढ़ती है। इसके बदले में उसे 100-150 रुपये मजदूरी मिलती है।
शर्मिला बताती है कि उसने जब यह काम शुरू किया तो पड़ोसी उसे हैरत से देखते थे। लेकिन अब तो उसे गांव के लोग बड़ी मान-मनौवल के साथ बुलाते हैं। शर्मिला के मुताबिक उसने यह काम उस वक्त शुरू करने का फैसला किया जब उसके पति का नारियल तोड़ने को लेकर कुछ मजदूरों से झगड़ा हुआ। यह वाकया उसके नए घर में प्रवेश की पूर्व संध्या का था। नतीजतन उसका घर वीरान पड़ा रहा। इसके बाद शर्मिला ने भगवान और अपने पिता का आशीर्वाद लेकर खुद यह काम शुरू कर दिया। कुछ झिझक के बाद उसके पति ने भी इस काम में मदद करनी शुरू कर दी। कुर्सी बुनने, सिलाई-कढ़ाई में पारंगत और दो बच्चों की मां शर्मिला बताती है- पेड़ कितना भी ऊंचा क्यों न हो, मुझे चढ़ने में कोई दिक्कत नहीं होती।

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