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सर, मैं बहुत गरीब हूं..

  • प्रतीक्षा सक्सेना
गाजियाबाद, सर, मैं बहुत गरीब हूं। नकल कराने के लिए दूसरे छात्रों की तरह दो हजार रुपये नहीं दे सकता। उसकी सजा मुझे उन छात्रों से जिन्होंने उस शुल्क का भुगतान कर दिया है, से अलग बिठाकर दी जा रही है। अब मेरा भविष्य आपके हाथ में है..।
यह बानगी है जिले के एक मूल्यांकन केंद्र पर चेक होने के लिए आई कापियों में से एक कापी की। इस कापी पर छात्र ने बड़ी दयनीय अंदाज में इस बात का उल्लेख किया है कि किस तरह उसके केंद्र पर दो हजार रुपये नकल कराने के नाम पर लिए गए हैं और वह इतनी धनराशि दे पाने में अक्षम है। दरअसल मूल्यांकन केंद्र पर छात्रों की जो कापियां चेक होने के लिए आई हैं, वे नकल माफिया की सक्रियता की चुगली कर रही हैं। ये कापियां इलाहाबाद मंडल के एक कालेज की हैं, जिनमें कई ऐसी बातें हैं जो नकल माफिया की सक्रियता की ओर इशारा कर रही हैं।
जिले में तीन मूल्यांकन केंद्र बनाए गए हैं। उनमें से ही एक केंद्र पर विज्ञान वर्ग की कापी चेक हो रही थी। उसी दौरान एक कापी पर जब परीक्षक को छात्र की पीड़ा पढ़ने को मिली, तो वे हैरान रह गए। सूत्रों की मानें, तो उनके दो दशक के करियर में किसी कापी में छात्र द्वारा इस तरह से नकल माफिया के बारे में कभी पढ़ने को नहीं मिला।
इतना ही नहीं, जिस कालेज की ये कापियां हैं वहां एक ही पेपर में 49 छात्र अनुपस्थित पाए गए। नाम न छापने की शर्त पर परीक्षक दावा करते हैं कि इतनी बड़ी संख्या में बोर्ड की परीक्षा में छात्र किसी सामान्य परिस्थिति में अनुपस्थित नहीं हो सकते। वह आशंका जता रहे हैं कि संभव है कि इन छात्रों ने नकल के लिए पैसे न दिए हों और केंद्र पर उत्पीड़न के बाद उन्होंने परीक्षा छोड़ दी हो।
धांधली की बात यहीं समाप्त नहीं हो जाती। इसी कालेज में एक ही रोल नंबर की दो कापियां भी मिली हैं। जाहिर है कि कक्ष निरीक्षक की मिलीभगत के बिना ऐसा मुमकिन नहीं है, क्योंकि नियम यह कहता है कि कापियां गिनकर इकट्ठा की जाती हैं, तो फिर एक अतिरिक्त कापी कैसे आ गई।
उसके अलावा इसी कालेज की जो अनुपस्थिति शीट भरी गई है, वह बड़े अजब ढंग से भरी गई है। केंद्र के सूत्रों के मुताबिक, शीट से ऐसा लग रहा है जैसे किसी बच्चे या कम पढ़े लिखे इंसान ने भरी हो। हालांकि इस प्रकरण पर कोई भी शिक्षक खुलकर सामने आने को तैयार नहीं है, क्योंकि मामला अनुशासनहीनता का बन सकता है।
छात्र की भाषा पढ़ने में फेल हो गए मास्साब
ज्योतिबा फूले नगर [अमरोहा]। जी हां, एक छात्र ने अपनी उत्तर पुस्तिका में ऐसी भाषा लिखी, जिसको पढ़ने व समझने में सात शिक्षक फेल हो गए। हारकर उस कापी को रख लिया गया। इतना ही नहीं एक परीक्षार्थी ने हिंदी विषय की कापी को ही कोरा छोड़ दिया, जिसको देखकर परीक्षक भी हैरान रह गए।
कुंदन मॉडल इंटर कालेज पर उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन धीरे-धीरे तेजी पकड़ रहा है। सूत्र बताते हैं कि मूल्यांकन के दौरान इंटरमीडिएट अर्थ शास्त्र के छात्र ने अपनी उत्तर पुस्तिका में अपठनीय भाषा लिखी, जिसको केंद्र उपनियंत्रक ने कई-कई शिक्षकों से पढ़वाया, किंतु सभी शिक्षक उसको समझने में नाकामयाब रहे। बताया जाता है कि भाषा को सात शिक्षकों ने पढ़ने की कोशिश की, लेकिन सभी ने हाथ खड़े कर दिए। अंत में शिक्षकों ने उस उत्तर पुस्तिका को अलग रख लिया और बाद में जांचने की बात कही।
सूत्रों के मुताबिक इसी केंद्र पर इंटरमीडिएट सामान्य हिंदी विषय की कापियों के मूल्यांकन के दौरान एक उत्तर पुस्तिका ऐसी मिली, जिसमें कुछ नहीं लिखा था। पूरी कापी कोरी थी। हिंदी विषय की उत्तर पुस्तिका खाली देखकर परीक्षक भी अचंभे में पड़ गए।
सौजन्यःजागरण

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