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झांसे की शिकार आदिवासी लड़कियां

विकास श्रीवास्तव
छत्तीसगढ़ के आदिवासी बहुल क्षेत्रों से कम उम्र की लड़कियों के गायब होने का सिलसिला बदस्तूर जारी है। पिछले कुछ वर्षों में हजारों की संख्या में लड़कियां और महिलाएं गायब हो चुकी हैं। पिछले साल १६ जून से छत्तीसगढ़ के सभी जिलों में मिसिंग पर्सन स्क्वाड का गठन कर राज्य सरकार मामले को गंभीरता से लेने का दिखावा कर रही है लेकिन गुम इंसान खोजने के लिए जिला पुलिस के अधिकारी ही अन्य कार्यों के साथ इस काम को भी कर रहे हैं। हालंकि पुलिस मुख्यालय द्वारा गठित टीम से भी स्क्वाड के लिए काम करने की बात कही जा रही है, लेकिन पिछले वर्ष गायब हुईं ३५० से अधिक लड़कियों और महिलाओं तक पुलिस नहीं पहुंच पाई है। लंबे समय से यह बात लगातार सामने आती रही है कि प्रदेश की आदिवासी लड़कियों को नौकरी और अच्छी जिंदगी देने के नाम पर दिल्ली, मुंबई, कोलकाता व पड़ोसी राज्यों में ले जाया जा रहा है। पिछले वर्ष दो दर्जन से अधिक लड़कियों को दिल्ली सहित अन्य शहरों में ले जाया गया। २५ मई २००७ को रायगढ़ पुलिस द्वारा गिरफ्तार आरोपी ने २० लड़कियों को दिल्ली में बेचने की बात स्वीकार की थी, जिसमें हर एक लड़की के लिए १५०० रुपए कमीशन आरोपी द्वारा लिए जाने की बात बताई जाती है। वहीं पिछले वर्ष अगस्त से अक्टूबर माह के मध्य ३०१ लड़कियों व ४६९ महिलाओं के गायब होने की जानकारी प्रदेश के विभिन्न थानों में दर्ज है। इस वर्ष मार्च माह में बस्तर के दंतेवाड़ा जिले के सुरनार गांव से १० आदिवासी लड़कियों के गायब होने की बात सामने आई थी। गांव के सरपंच ने इसकी शिकायत पुलिस से की थी। दंतेवाड़ा एसपी राहुल शर्मा ने बताया कि ये लड़कियां वापस आ गई हैं। इन १० युवतियों सहित एक युवक भी लौटा है। इन्हें एक ठेकेदार द्वारा काम के लिए आंध्र प्रदेश ले जाया गया था। ठेकेदार फरार है। उसके खिलाफ बालश्रम अधिनियम के तहत कार्रवाई की जाएगी लेकिन सवाल यह उठता है कि श्रम के लिए कम उम्र की लड़कियों को ले जाने का क्या मतलब है? लड़कियों को कमीशन लेकर सौदेबाजी करने वाले दलाल कोरबा, जशपुर, जगदलपुर, बिलासपुर, जांजगीर-चांपा में सक्रिय हैं। जशपुर के खरिङारिया गांव व पत्थलगांव के कापू थाने से दो १६ वर्षीय युवतियां लापता थीं। वहीं पत्थलगांव थाने से ही ११ वर्षीय लड़की २ मई से लापता थी। कापू थाने के रतनपुर गांव की एक १६ वर्षीय युवती को महानगर में नौकरी दिलाने के नाम पर ले जाया गया था।
हरिभूमि में ६ अप्रैल को प्रकाशित रिपोर्ट तस की तस पोस्ट कर रहा हूं

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