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पुलिस ने बनाई मनगढंत कहानी

युवती को निर्वस्त्र दौड़ाने का मामला
रायपुर के ओसीएम चौक की एक युवती पर घातक हमला कर उसे निर्वस्त्र दौडऩे के लिए मजबूर करने के मामले में पुलिस ने अब रामगोपाल वर्मा की फैक्ट्री से बनकर खपने वाली फिल्म के अंदाज में एक नई कहानी गढ़ी है। पुलिस ने यह झूठी कहानी अपनी चमड़ी और कभी-कभार दिखने का अहसास कराने वाली नाक को बचाने के लिए बनाई है। पुलिस यदि ऐसा नहीं करती तो शायद लोगों का गुस्सा और भड़कता? और पंचायत में प्रदेश की आधी आबादी को महत्व देने की घोषणा करने वाली सरकार की थोड़ी किरकिरी भी होती? लगातार हो रही थू॥ थू॥ से बचने के लिए कहानी का होना जरूरी था। लेकिन कहानी को गढऩे में पुलिस से जो चूक हो गई वह उसकी पोल खोलने के लिए पर्याप्त है।पहले पुलिस की कहानी पर गौर फरमाते हैं। सीएसपी आईएच खान ने शुक्रवार को पत्रकारों को जो जानकारी दी उसके मुताबिक घटना की रात असिफ नामक युवक बाबर बंगला में रहने वाली एक कार्लगर्ल के साथ ओसीएम चौक के पास से गुजरा तो उसे वहां पहले से खड़ी मोनिका ने पकड़ लिया। मोनिका युवती को मारते- पीटते अपने घर ले गई जहां थोड़ी देर बाद आसिफ भी बीच बचाव करने के लिए पहुंच गया। मकान के ऊपर पहुंचने पर वहां पहले से मौजूद पूजा और रेखा नाम की लड़कियों ने आसिफ से मारपीट शुरू कर दी। मकान के ऊपरी हिस्से में मारपीट होते देख ताहिर खान जो वही कही आसपास खड़ा था उसने अपने साथियों को बुलाया और आसिफ को बचाने की कोशिश की। लड़के जब रिद्धी सिद्धी अपार्टमेंट के ऊपर चढऩे लगे तो लगा इस उन पर पथराव किया गया। इससे लड़के गुस्से में आ गए और उन्होने मारपीट शुरू कर दी। मारपीट में दो लड़की पड़ोस की बिल्डिंग से कूद कर भाग गई लेकिन एक लड़की लड़कों के हाथ लग गई जिससे युवक मारपीट करने लगे। युवती को थाने ले जाने की बात पर मामला गरमा गया। पुलिस ने इस मामले में मोहम्मद ताहिर पिता जहरूद्दीन (३० वर्ष) निवासी बूढ़ापारा, आबिद मोहम्मद पिता प्यारे मोहम्मद (२४ वर्ष) निवासी बैरनबाजार, मुनीर खान पिता जहरुद्दीन (२८ वर्ष) निवासी बूढ़ापारा, मो एजाज पिता इरशाद मोहम्मद (२७ वर्ष)निवासी रहमानियां चौक, विनोद पिता सूर्यकांत शुक्ला (३० वर्ष) निवासी सदर बाजार,नैनसी पाल पिता सुनील पाल (१८ वर्ष) बाबर बंगला,के खिलाफ धारा ३२३, २९४, ५०६, ३५४, ४५२, १४७, १४८ के तहत मामला दर्ज कर लिया है। आसिफ और कुछ अन्य आरोपी फरार है।

सवाल जो उठते हैं?

१-पुलिस कल तक अखबारों के जरिए यह प्रचार-प्रसार करने में लगी थी कि ओसीएम चौक की युवतियां लूटपाट करती है क्या यह कहानी फिस्स हो गई?

२-पुलिस के रहस्य-रोमांच से भरे ड्रामें में एक नई कार्ल गर्ल की इंट्री हो गई है। पुलिस ने यहां भी एक लड़की को कार्ल गर्ल बताने की कोशिश कर यह बताने का प्रयास तो किया ही है कि जिस लड़की के साथ हादसा हुआ वह अनैतिक धंधे में लिप्त थी। अनैतिक धंधे में लिप्त लड़की पर पुलिस ने देह व्यापार से संबधित धाराओं का इस्तेमाल नहीं किया? क्या यह माना जाए कि पुलिस भी यह मानती थी कि लड़कियों पर लगाए गए आरोप घटना दिनांक के दिन तो झूठे थे?

३-क्या निर्वस्त्र होने वाली लड़की ने नई कार्लगर्ल को घर ले जाकर इसलिए पीटा कि वह उसके प्रिय को उससे छीनकर ले जा रही है। यदि हां तो क्या...

४-जिस नई कार्लगर्ल के साथ मारपीट की गई क्या उस लड़की ने पुलिस के पास आकर कोई रिपोर्ट लिखाई? यह आसिफ कौन है? क्या उसने किसी तरह की कोई शिकायत दर्ज कराई कि वह ऐशो आराम के लिए लड़की लेकर जा रहा था लेकिन उसे ऐश नहीं करने दिया गया। उसे तीन लड़कियों ने बुरी तरह पीटा और वह मार खाता रहा।

५-पुलिस को यह बात उन लोगों ने बताई है जो जमानत पर रिहा होने के लिए दो दिन बाद गिरफ्तार किए गए थे? (जानकारी के अनुसार गिरफ्तार किए गए सारे युवकों को पुलिस की कमजोर प्रस्तुति के कारण जमानत मिल गई है)।

६- पुलिस ने बताया कि जब लड़के ऊपर चढऩे लगे तो लड़कियों ने पथराव किया। क्या लड़कियों को पहले से पता था कि उनके साथ बेहद बुरा बरताव होने वाला है? क्या लड़कियों ने पहले से पत्थरों को जमा कर रखा था?

७-घटना के दिनांक से पुलिस मामले को आसपड़ोस के लोगों को स्वाभाविक गुस्सा बता रही थी लेकिन अचानक पुलिस की कहानी से आसपड़ोस के लोग गायब हो गए है? अब सारे तत्व बाहरी है? और इन बाहरी तत्वों में से ही किसी ने युवती का कपड़ा फाड़ा? फटे कपड़े के बाद युवती अर्धनग्न होकर सड़क पर दौडऩे के लिए मजबूर हुई।

८-बढ़ते विरोध के चलते पुलिस ने धाराएं तो बढ़ा तो दी है लेकिन युवती को निर्वस्त्र करने और उस पर प्राणघातक के मामले में कोई धारा नहीं लगाई गई है। पुलिस के मुताबिक यह शिकायत १ अप्रैल की रात युवती ने की थी। लेकिन तीन अप्रैल तक पुलिस धारा ३२३, २९४, ५०६, ३५४, ३४ पर ही अटकी रही ऐसा क्यों?

९- घटनाक्रम में दो दर्जन से ज्यादा लोग लिप्त हंै। पुलिस इन्हें इसलिए भी बचाने का प्रयास करती रही क्योंकि इसमें शामिल एक दो लोग कांग्रेस में छुटभैय्ये नेता भी हंै। ये नेता प्रदेश में पदस्थ एक पुलिस अफसर का काफी करीबी बताकर लोगों के ट्रांसफर आदि करवाता रहा है।

हरिभूमि में पांच अप्रैल को प्रकाशित रिपोर्ट तस की तस पोस्ट कर रहा हूं

1 comment:

Sanjeet Tripathi said...

बहुत सही!!