Sunday

कछुए बने मिसाइल परीक्षण में बाधा

केंद्रपाड़ा जिले के गाहिरमाथा समुद्र तट पर बड़ी संख्या में पाए जाने वाले कछुए आम तौर पर मार्च में ही अंडे देने लगते हैं। उड़ीसा के एक समुद्र तट पर पाए जाने वाले कछुए इस साल अंडे देने में देरी कर रहे हैं। लेकिन इस बार आधा अप्रैल बीत जाने के बाद भी यह प्रक्रिया शुरू नहीं हुई है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह देरी इस इलाके में हुए मिसाइल अग्नि-1 के परीक्षण की वजह से हुई है। यह परीक्षण 23 मार्च को हुआ था। लिहाजा उड़ीसा सरकार ने रक्षा अनुसंधान व विकास संगठन [डीआरडीओ] को चिट्ठी लिख कर इस मिसाइल का अगला परीक्षण टाल देने का आग्रह किया है। यह परीक्षण अप्रैल के आखिरी सप्ताह में होने वाला है। प्रमुख वन्य जीव संरक्षक बीके पटनायक के मुताबिक हम डीआरडीओ को परीक्षण टालने के लिए कह चुके हैं ताकि भीतरकणिका राष्ट्रीय उद्यान के तहत आने वाले गाहिरमाथा तट पर कछुओं द्वारा अंडे देने की प्रक्रिया बाधित न हो। हालांकि इस मामले पर कछुआ संरक्षण समूह की अलग राय है। आपरेशन कच्छप के सचिव विश्वजीत मोहंती के अनुसार भद्रक जिले के धमारा में बन रहे बंदरगाह के कारण समुद्री फैलाव में कमी के चलते कछुओं के अंडे देने की प्रक्रिया बाधित हुई है। अब कारण जो भी हो, लेकिन कछुओं के कारण मिसाइल का परीक्षण टाले जाने के सरकार के आग्रह पर डीआरडीओ क्या रुख अपनाता है, यह देखना दिलचस्प होगा।

No comments: