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ऐसी सजा किसी को भी न मिले

बिलासपुर. धार्मिक उन्माद की आग में झुलस रहे बोड़सरा में एक ऐसी घटना भी हुई, जो किसी भी इंसान की मानवीय संवेदनाओं को झकझोरकर रख दे। बीमारी से जूझते हुए दो माह से खाट पर पड़ी अधेड़ महिला चार दिनों तक केवल पानी के सहारे जिंदा रही। लाठीचार्ज के बाद भागते समय उसका पति घर में बाहर से ताला लगाकर चला गया। बुधवार को सर्वे कर रहे प्रशासन के दल ने उसे बाहर निकालकर अस्पताल पहुंचाया।
बीमार पड़ी प्यारी बाई के लिए 12 अप्रैल की शाम मुसीबतों का पहाड़ लेकर आई। वह अपने पति के साथ बोड़सरा में रहती थी। पैर में तेज दर्द और सूजन की वजह से लगभग दो माह से वह बिस्तर पर ही पड़ी थी। शनिवार को बोड़सरा मेला-स्थल से निकाले गए जुलूस में उसका पति भी शामिल हुआ। बलवा के बाद पुलिस आरोपियों को तलाशने लगी। गिरफ्तारी के डर से उसका पति घर में बाहर से ताला लगाकर भाग खड़ा हुआ।
महिला घर के भीतर ही थी। वह चल फिर भी नहीं सकती थी। पहले दिन महिला ने गांव वालों को दरवाजा खोलने के लिए पुकारा, लेकिन सूने गांव में उसकी आवाज सुनने वाला कोई नहीं था। घर में भोजन के नाम पर कुछ भी नहीं था। एक बर्तन में पानी रखा था। पानी के सहारे ही उसने चार दिन गुजार दिए। पहले से ही बीमारी से जुझ रही महिला काफी कमजोर हो गई और तेज आवाज में पुकारने का दम भी उसमें नहीं बचा। उसकी हालत बिगड़ती ही गई। आज दोपहर बिल्हा तहसीलदार मरकाम कुछ पटवारियों के साथ बोड़सरा में हुए नुकसान का जायजा लेने के लिए सर्वे कर रहे थे। तभी उन्हें एक घर के भीतर से किसी महिला के कराहने की आवाज सुनाई दी। ध्यान से सुनने पर पता चला कि आवाज जिस घर से आ रही है, उसमें बाहर से ताला लगा हुआ है। घर का ताला तुड़वाकर जब वे अंदर पहुंचे, तो प्यारी बाई बिस्तर में गंभीर हालत में पड़ी हुई थी। काफी देर तक पूछने पर वह बमुश्किल जवाब दे पाई कि पिछले चार दिनों से उसके पेट में अन्न का एक दाना भी नहीं गया है। उसे तुरंत बोड़सरा के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र भिजवाया गया। उसकी हालत को देखते हुए डाक्टरों ने तुरंत उसे ग्लूकोज चढ़ाकर प्राथमिक उपचार किया। इसके बाद तत्काल उसे सिम्स रिफर कर दिया गया।
साभारःभास्कर

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