Saturday

पांच साल बाद अपने शहर में

दुनिया बहुत छोटी सी हैं। सुना था पर अब एहसास भी हो गया फिर अपने शहर भोपाल आकर। मैंने एक मई को पत्रिका का दामन थाम लिया। इसके पहले चार साल तक हरिभूमि में प्रथम पेज पर सेवाएं दी।

4 comments:

Sanjeet Tripathi said...

शुभकामनाएं

Udan Tashtari said...

अपने शहर वापसी की बधाई एवं शुभकामनाऐं.

दिनेशराय द्विवेदी said...

आप को बधाई, घर लौटने की। कभी मुलाकात हो सकती है, आप से भोपाल में।

sourabh tiwari said...

lekin apne shahar panhuch kar purane longo ko bhool mat jana.