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'संत नहीं वेश्या बनना पसंद करूँगा'

क्रिकेटर वेश्याओं से अलग नहीं होते...महेश भट्ट की फ़िल्म जन्नत का ये डायलॉग कितने विवादों को जन्म देगा, ये तो नहीं पता। लेकिन इतना ज़रूर है कि इस संवाद से बिंदास महेश भट्ट को कोई चिंता नहीं. फ़िल्म जन्नत में इमरान हाशमी ने एक सट्टेबाज़ की भूमिका की है. फ़िल्म में एक जगह उनका चरित्र कहता है- देखिए सर, क्रिकेटर और वेश्याओं के बीच ज़्यादा फ़र्क नहीं होता. दोनों की जवानी ख़त्म तो कहानी ख़त्म. इस पर बिंदास महेश भट्ट कहते हैं- जी हाँ, जन्नत में ठीक यही संवाद है. लेकिन इसमें ग़लत क्या है. अगर आप इस बारे में सोचें तो हम सभी वेश्या ही तो हैं. कम से कम ये अपना वादा तो पूरा करती हैं. मैं भी वेश्याओं से अलग नही हूँ. मैं भी आनंद बेचता हूँ. और हाँ मैं तो संत की बजाए वेश्या बनना पसंद करूँगा. अपनी फ़िल्म अर्थ, ज़ख़्म और वो लम्हे से कई विवादों को हवा देने वाले महेश भट्ट इस बार भी पीछे हटने वाले नहीं। कम से कम फ़िलहाल तो यही दिख रहा है।
बीबीसी

1 comment:

mamta said...

और आजकल के क्रिकेटर को देख कर ग़लत भी नही लगता है।