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पुत्री से दुष्कर्म हत्या से भी जघन्य अपराध

दिल्ली की एक अदालत ने बेटी से दुष्कर्म करने वाले एक व्यक्ति को दस साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाते हुए उसके अपराध को अविश्वसनीय और हत्या से जघन्य करार दिया है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश संजय शर्मा ने अपने फैसले में कहा कि दोषी के खिलाफ साबित हुए आरोप बेहद खौफनाक प्रवृति के हैं। इसे अपनी बेटी से दुष्कर्म करने का दोषी पाया गया है। यह हत्या से जघन्य अपराध है। 45 वर्षीय सरकारी कर्मचारी तथा शिकायतकर्ता के पिता बलबीर सिंह को धारा 376 तथा 507 के तहत दोषी ठहराते हुए अदालत ने कहा इस बात पर यकीन नहीं होता कि ऐसा अपराध उस व्यक्ति ने अंजाम दिया है, जिससे पीडि़ता की रक्षा करने की उम्मीद की जाती है। अदालत ने हाल ही में दिए अपने फैसले में दोषी को सजा के साथ दस हजार रुपये जुर्माना अदा करने के भी निर्देश दिए।
अभियोजन पक्ष के अनुसार तीन अप्रैल 2005 को बलबीर सिंह ने विवेक विहार स्थित अपने आवास पर अपनी 15 वर्षीय बेटी से दुष्कर्म किया और उसे किसी को भी घटना की जानकारी नहीं देने के लिए धमकाया। 11 अप्रैल 2005 को बिना मां की इस बच्ची ने अपनी एक सहेली के पिता और वकील से मदद मांगी और अदालत में शिकायत दाखिल की, क्योंकि पुलिस ने उसकी अपील पर कार्रवाई करने से इनकार कर दिया था। अदालत में बहस के दौरान बचाव पक्ष ने पीडि़ता पर चरित्रहीन होने का आरोप लगाया और साथ ही कहा कि उसके अपनी सहेली के भाई से शारीरिक संबंध हैं।
इस दलील को खारिज करते हुए अदालत ने कहा कि यह और भी निंदनीय है कि जिस व्यक्ति पर अपनी बेटी से दुष्कर्म का आरोप है, वही बेटी के चरित्र पर लांछन लगा रहा है। अदालत ने शिकायत दर्ज कराए जाने में आठ दिन की देरी होने के संबंध में कहा कि इतनी मासूम उम्र की बच्ची के लिए ऐसे मामले में तत्काल कदम उठाना इतना आसान नहीं है और वह भी ऐसे समय में जब उसके सिर पर मां का साया नहीं हो। अभियोजन पक्ष ने इस मामले में अपने आरोपों को साबित करने के लिए 19 गवाह पेश किए।

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