Monday

ऑन लाइन रोमैंस

  • सुषमा

नजरें स्क्रीन पर चस्पा। उंगलियां की-बोर्ड पर गतिशील। वक्त सेवन पी.एम.। जी हां, आपने ठीक समझा। वही चैटिंग का मामला। इधर डेजी है, उधर संजोग। किन्हीं कारणों से जब नियमितता भंग होती है, तब दूसरे दिन डेजी संजोग को सफाई दे रही होती है और संजोग अंग्रेजी की प्रचलित गालियां देता है। डेजी निहाल होती रहती है। संजोग को मैंने दीवाना बना रखा है। सुनिश्चित किया गया यह एक घंटा नेट पर देने के लिए डेजी को बहुत से काम जल्दी-जल्दी संपादित करने पडते हैं। उसे लगता है कि पढाई प्रभावित हो रही है, पर उसे यह भी लगता है ऐसा आनंद और रोमैंस अब तक न मिला था। जिस दिन दिनचर्या से यह सात से आठ का वक्त निकल जाएगा जिंदगी के अर्थ खो जाएंगे। ओह..कहां मालूम था इंटरनेट की दुनिया इस कदर तिलिस्मी होती है।
डेजी ठीक वक्त पर नेट के लिए निकलती है। घर में इस घटना को लक्ष्य किया जाता है, लेकिन डेजी जानती है कि घरवालों को किस तरह झांसा देना है। अल्पशिक्षित मां को बेवकूफ बनाना बहुत आसान है।
मां, तुम एम.बी.ए. की स्टूडेंट होतीं तो समझतीं कि मैं साइबर कैफे क्यों जाती हूं। डेजी कुछ तमीज सीखो। नेट पर तमीज ही सीखती हूं। कॉस्मोपोलिटन मैनरिज्म। मां तुम नहीं जानतीं इंटरनेट सूचना का असीमित भंडार है और अपडेट नॉलेज के लिए इसका नियमित इस्तेमाल कितना जरूरी है। इंटरनेट स्टूडेंट के लिए रिक्वायरमेंट बन गया है।
पिता कहते हैं, रिक्वायरमेंट? मुझे लगता है डेजी तुम वक्त बर्बाद कर रही हो। पापा आपने कंप्यूटर ऑन करना सीखा नहीं और कहते हैं मैं वक्त बर्बाद कर रही हूं। मैंने तो कहा था मैं उस छोटे शहर से नहीं, किसी अच्छे इंस्टीटयूट से एम.बी.ए. करना चाहती हूं। आप नहीं माने। कॉलेज का स्तर देख तो रहे हैं। मुझे स्टडी के लिए नेट पर बैठना पडता है। स्टडी के लिए फिक्स्ड टाइम क्यों? दीदी, जरूर कुछ गडबड है। छोटे भाई सनत की बात पर डेजी भडकती है।
सनत मुझे अपने जैसा न समझना। तुम रोज चैटिंग फ्रेंड बनाते और बदलते हो, तुम्हें कोई नहीं रोकता। लडके हो, बिगड गए तो फर्क नहीं पडेगा। मैं रीसेंट रिसर्च पर कुछ मैटर कलेक्ट करने जाऊं तो भी शक हो जाता है। डेजी पहले साइबर कैफे जाने में घबराती थी। सनत जिद करके ले गया था। सनत ने छोटे से माउस को चलाकर कैसे-कैसे करिश्मे स्क्रीन पर दिखा दिए थे। दीदी, गूगल जैसे बडी लाइब्रेरी इस छोटे से डिब्बे में बंद है। दुनिया भर की सूचनाएं पलक झपकते हाजिर। चैटिंग जानती हो, कैसे की जाती है? मैं तो मेट्रोज में रहने वालों को चैट फ्रेंड बनाता हूं। मेट्रोज में अच्छा करियर तलाशा जा सकता है। तब ये फ्रेंड्स मदद कर सकते हैं। कंप्यूटर का करिश्मा देख कर डेजी चकित थी। इंटरनेट का उपयोग करते हुए उसने जाना कि उसे अब तक खबर नहीं हुई कि उसके भीतर कितनी इच्छाएं, मकसद, ऊंची उडानें मौजूद हैं। जाना कि सपनों का आकार बहुत बडा है, वह बेहद मामूली सपने देखती है और मुमकिन हो न हो, पर उसे ढेर पैसा पाने और फॉरेन टूर जैसे इरादे जरूर रखने चाहिए।
चैटिंग भी अजीब माया थी। चैट फ्रेंड की बातें उसके जेहन में प्रतिध्वनि होती रहती थीं। लगता था कि पढाई चौपट हो रही है। दिमाग में कैसी कैसी बातें आने लगी हैं। अब तक कम लोगों के बारे में सोचती थी, अब बहुत लोगों के बारे में सोचने लगी हैं। हीनभावना भी आई कि लोग कितनी अच्छी बातें करते हैं, उसे बहुत अच्छी बातें करना नहीं आता। यह भी लगा वह एक किस्म की यातना से गुजर रही है। लगता कोई उसका पीछा कर रहा है। सोचती, चैट फ्रेंड अचानक सामने आ जाए तो पहली प्रतिक्रिया क्या देगी? यह तो बिलकुल नहीं जानती थी ड्रीम ब्वॉय नेट पर मिलेगा। वह ऑन लाइन रोमैंस करेगी। जिंदगी दमादम हो जाएगी।
डेजी प्रेजेंटेशन के लिए नेट पर मैटर ढूंढ रही थी। खास सफलता नहीं मिली तो बोर होकर उसने चैट फाइल खोल ली। ऑन लाइन लिस्ट में लडकों के नाम पर मैसेज दिए। कहीं से रेस्पांस नहीं मिला। फिर संयोग कहें, नियति या भाग्य, उसे संजोग मिल गया।
आर यू फ्री फॉर चैटिंग? या एएसएल प्लीज (ऐज सेक्स लोकेशन)। ट्वेंटी, फीमेल सतना (इंडिया)। संजोग हियर, ट्वेंटी फाइव, इंदौर। नेम? डेजी मालवीय, एम.बी.ए. कर रही हूं, तुम? एम.बी.ए. कर चुका हूं। ऑक्यूपेशन? बिजनेस। हुंडई की एजेंसी है। अबाउट फैमिली? घर का इकलौता चिराग। करोडों का मालिक। चश्मा लगाता हूं, पर हैंडसम हूं। मैरिटल स्टेटस? अनवेड।
फेक इन्फॉर्मेशन तो नहीं दे रहे हो? क्यों पूछ रही हो? क्या किसी साइबर लंपट ने तुम्हें सताया? मैं फेयर लडका हूं। साइबर लंपट? हां, यही समझ लो। होता है। डेजी तुम हर तरह की बातें सुनने की स्पिरिट डेवलप करो। कॉन्फिडेंस लेवल हाई होगा। कॉन्टेक्ट नंबर? मैं इतनी जल्दी कॉन्टेक्ट नंबर नहीं बताती। ठीक करती हो। मैं भी अपनी प्राइवेट लाइफ न बताता हूं और न किसी की जानना चाहता हूं। कम से कम वेरी फ‌र्स्ट मीट में नहीं।
तुम्हारी सोच मेरी सोच से मिलती है। सिलसिला चल निकला। संजोग, एम.बी.ए. के बाद क्या करूं? जॉब या भोली लडकी की तरह शादी। कुछ न बनें लडकियां, पर सुगृहिणी हो जाती हैं। मैं जॉब करूंगी। मुझे इंदौर में प्लेसमेंट मिल सकता है?
हां, मेरे शो-रूम में और मेरे दिल में। विश्वास नहीं होता। संदेह करोगी तो स्वतंत्र भाव से जी नहीं सकोगी, न बेहतर अवसर मिलेंगे।
दिल में प्लेसमेंट? क्या यही प्यार है। क्या मैं संजोग से प्रेम करने लगी हूं। तभी तो दिल में एक किस्म की बेचैनी, खुमारी, खलबली पाती हूं। क्या इश्क करना अच्छी बात है। बिल्कुल, तभी न एक आग का दरिया है और डूब कर जाना है जैसे हाई रिस्क के बावजूद इश्कबाजों की संख्या में गिरावट न आई। लिखने वालों ने प्रेम एक पूजा है जैसी अच्छी शुरुआत कर इश्क कमीना जैसी बरगलाने वाली बातें लिख डालीं, लेकिन गजब बात यह रही इश्कबाजों ने हौसले नहीं छोडे। बदल गई डेजी की जिंदगी। बदल गए अंदाज। बदल गई दुनिया। क्लास में कन्सन्ट्रेशन नहीं बनता। प्रेजेंटेशन में गडबडा जाती। सेमिनार या गेस्ट लेक्चर होते तो बार-बार घडी देखती-सेवन पी.एम.। संयोग इंतजार कर रहा होगा। वह दो दिन बाद साइबर कैफे जा सकी। संजोग बेहद कुपित था।
दो दिन से लापता थीं, कहां मर गई थीं? गेस्ट लेक्चर यार। दिल्ली से एक खब्ती प्रोफेसर आ गया था। उसकी ट्रेन यहां पांच घंटे लेट पहुंची। शाम से क्लास ली तो देर रात तक झोंकता रहा। कई लडकियों के पापा और भाई इंस्टीटयूट आ गए कि लडकियां कहां रह गई। तुम्हारे भी? हां।
मेरी कंपनी जॉइन करो तो पापा या भाई को मत लाना। लिसिन, कल अमेरिका जा रहा हूं। इंदौर से दिल्ली की फ्लाइट, फिर दिल्ली से जूम? (हवाई जहाज ढूंढने का ध्वनि संकेत)। मैं कभी प्लेन में नहीं बैठी, डर लगता है। जो डर गया वह मर गया। अब पंद्रह दिन बातें नहीं होंगी। मैं जब जाग रहा होऊंगा तुम सो रही होगी।
अमेरिका किस परपज से जा रहे हो? मैं यह सब नेट पर नहीं बताता। विवरण सार्वजनिक हो सकते हैं। हम बडे लोगों को साइबर जासूसों से सावधान रहना पडता है। मैं जासूस नहीं।
तुम भोली लडकी हो, इसीलिये गीता पर हाथ रख कर वचन देता हूं जो कहूंगा सच कहूंगा। डेजी ने ये पंद्रह दिन हडबडी में बिताए। इस बीच दो बातें हुई। इंदौर की एक फर्म से उसे इंडस्ट्रियल ट्रेनिंग के लिए कॉल लैटर मिला और मां ने बताया कि अगले पखवाडे उसे लडके वाले देखने आ रहे हैं। डेजी ने मां को अफसोस से देखा, मां उन्हें आने से रोको। मैं उस लडके से शादी नहीं करूंगी। प्राइवेट कॉलेज में पढाता है। क्या सैलरी होगी? आठ या दस हजार। अब एक आई.ए.एस. लडका ढूंढेंगे तो उसके लिए हम पचास लाख कहां से लाएंगे? तुम्हारे पापा छोटी सी कंपनी में छोटे एकाउंटेंट? पचास लाख की जरूरत नहीं। मैंने अपने लिए नेट पर सुपात्र ढूंढ लिया है। पैसा एक न लगेगा और करोडों का माल मेरा।
डेजी की भंगिमा देख मां चौंक गई। डेजी हमारे ये संस्कार नहीं कि लडकी खुद अपने लिए लडका ढूंढ ले। थोडा अक्ल से काम लो। मां न मेरी अक्ल मेरे पास है और न दिल। दोनों इंदौर के विजय नगर में भटक गए हैं। तुम उसे जानती कितना हो? जानते तो हम उन्हें भी नहीं जिनसे एक या दो मुलाकात में शादी कर लेते हैं। तुम पापा को जानती थीं? अब भी कहती हो कि पापा को ठीक से नहीं समझ पाई। मेरी और संजोग की रुचि, मिजाज, विचार बहुत मिलते हैं। बुद्धिमान लोग कहते हैं अब कुंडली नहीं, केमिस्ट्री मिलानी चाहिए। यही आदर्श व्यवस्था है। संजोग यदि हब्शी की शक्ल का हुआ तो? क्या फर्क पडता है? लोग कहते हैं नाम में क्या रखा है, मैं कहती हूं शक्ल में क्या रखा है। लडकियों को पति नहीं, पैकेज चाहिए। एक रिची-रिच। मां मुझे अच्छी जिंदगी चाहिए। पैसा, सुख, चैन, ऐश। मैं इंडस्ट्रियल ट्रेनिंग में इंदौर जा रही हूं। संजोग को जानने का मौका मिला है। भगवान ही यह संयोग बना रहे हैं। डेजी तुम बडी-बडी बातें करने लगी हो। मां, जमाना बदल गया है। संजोग को अच्छी तरह जान-समझकर ही अंतिम फैसला करूंगी। बेटी के सपनों ने मां को भी उकसा दिया। शायद सुयोग बन ही जाए।
संजोग लौट आया। डेजी के प्राण बहुरे। संजोग ये पंद्रह दिन यातना में गुजरे।सेम विद मी। आशिक बनाया आपने। मैं ट्रेनिंग के लिए इंदौर आ रही हूं। मेरे रहने के लिए कुछ व्यवस्था हो सकती है? हां, मेरे दिल में। डफर और डेजी के लिए यह अच्छी खबर। डेजी मैं एक कॉन्फ्रेंस में भाग लेने खजुराहो आ रहा हूं। वहां से सतना कितनी दूर है?
बस तीन-चार घंटे का रन, आओ न। हां, तुम्हारे दर्शन हो जाएंगे। पहचानूंगी कैसे? मेरे हाथ में लाल गुलाब होगा। बेवकूफ जिस होटल में ठहरूंगा इन्फॉर्म कर दूंगा। वंडरफुल, मेरा सेल नंबर नोट करो। डेजी खुशी से मचल गई। हे भगवान इंटरनेट ने सब कितना आसान कर दिया है। वह अपने रूप को निखारने में लग गई। पहली बार ब्यूटी पार्लर गई। महिलाओं-लडकियों की बेहिसाब भीड। ये लोग अपनी स्किन टोन सुधारने और नाखून तराशने में कितना अधिक समय और पैसा खराब करती हैं। वह फेशियल कराते हुए पुलक रही थी-खूबसूरत तो मैं हूं ही, ऐसा जादू डालूंगी कि संजोग फेरे लेकर ही वापस जाए।
संजोग के आने का दिन। अब तक आ चुका होगा। कॉल क्यों नहीं करता? बताता नहीं कहां ठहरा है। मुझे उसका सेल नंबर लेना चाहिए था। मैंने अपना नंबर दे दिया, जबकि उसका लेना याद भी न रहा। इश्क ने गालिब निकम्मा कर दिया। डेजी मानो यातना शिविर में डाल दी गई हो और उसकी मां की बुद्धि देखिए। उसके गिरते मनोबल को बिल्कुल गिराए दे रही थीं। डेजी तुम इसी फ्रॉडिया के लिए कह रही थी कि शादी हो जाए तो करोडों का माल अपना? वह नहीं आएगा। मां फ्रॉड को फ्रॉडिया कहती हैं।
मां कुछ कारण होगा। इतनी जल्दी किसी नतीजे पर मत पहुंचो। डेजी इतनी जल्दी अपने यकीन को खोना नहीं चाहती थी। दीदी, तुम्हारे संजोग का एग्जिसटेंस है भी या नहीं, गोपनीयता बनी रहे, इसलिए कुछ लोग अपनी पहचान छिपाते हैं। संयोग फेक? सनत, चुप रहो न, संजोग ऐसा नहीं है। डेजी ने कहा तो पर उसे लगा अपने यकीन को देर तक नहीं संभाल पाएगी। उसने बहुत पाने की जो तमन्ना की है, वह फुस्स होने जा रही है। वह ठगी गई है, बेवकूफ बनाई गई है। सुबह से दोपहर हुई, फिर शाम, डेजी के सेल पर मैसेज आया। मेरे साथ कुछ लोग हैं, इसलिए तुम्हें होटल नहीं बुलाया। मैं व्यंकटेश मंदिर में हूं, कुंड की सीढी पर। ब्लैक जींस व्हाइट टी-शर्ट।
डेजी की आत्मा में बला की फुर्ती भर गई। मां, मैं क्या-क्या सोच गई थी। तुम लोग कुछ अच्छा सोचने नहीं देते। उफ, सनत मुंह फाडे न खडे रहो। मिठाई-समोसा ले आओ। मां कुछ तैयारी कर लेना। संजोग को न लगे कि हम कंगले हैं। मैं उसे लेकर आती हूं। डेजी ने इतनी तेज गति से स्कूटी अब तक न चलाई थी। तेज गति में एक खास किस्म का आनंद है। खस्ताहाल सडक में भी आनंद है। असंतुलित ट्रैफिक में आनंद है। मैं तुझसे मिलने आई मंदिर जाने के बहाने। डेजी मंदिर परिसर को पार कर पीछे की ओर बने कुंड पर पहुंची। चारों ओर चौडी सीढियों से घिरे कुंड में बारहों मास स्वच्छ पानी रहता है। दूसरी सीढी पर बैठे संजोग की पीठ दिखाई दे रही है। ब्लैक जींस, व्हाइट टी शर्ट। बाल बडे। ओह धोनी कट! अच्छा है, जो इस समय कुंड के आसपास लोग नहीं हैं। डेजी को भरोसा था अतिरेक में चिल्ला देगी संजोग। उस पर संकोच तारी हो गया और उसने शरीफ लडकी की तरह धीरे से कहा एक्सक्यूज मी। यस।
ब्लैक जींस, व्हाइट टी-शर्ट में लडकी बरामद होगी, यह डेजी के अरमानों में नहीं था। उसका दिल तेजी से धडक कर बैठने को था। यस। लडकी खडी हो गई। यहां कोई लडका शायद मेरा इंतजार करके चला गया। डेजी को नहीं मालूम कि कैसे खुद को कैसे संभाल सकी।
संजोग? हां..हां..हां..। मैं संजोग। फेक नेम। तुम डेजी? हां। बुल शिट। मैं तुम्हारी जगह किसी लडके को एक्सपेक्ट कर रही थी कि कोई लडका डेजी बन कर चैट कर रहा हो तो मजा आ जाए। लडकी इतनी सहज थी, जैसे अनुभवी हो। डेजी के लिए यह पहला हादसा था, सिवाय इसके कि एक लडका पहली चैटिंग में ही अश्लील बातें करने लगा था। अपमान और सदमे से उसका दिल भर आया। इस लडकी को अनुमान है इसने कितनी सुंदर दुनिया का अस्तित्व मिटा दिया है? इच्छा हुई लडकी का मुंह नोच ले पर यही कह सकी, मुझे नहीं मालूम था ऐसे खेल भी खेले जाते हैं। आई स्वेर डेजी मालवीय, तुम सचमुच भोली हो। आओ बातें करें।
मैं फेक लोगों से बात नहीं करना चाहतीं। लेकिन फेक लोगों से रोमैंस कर सकती हो! मेरी सलाह है ऑन लाइन याराना बनाओ, रोमैंस मत करो। यार तुम उस बंदे से इश्क कैसे कर सकती हो, जिसे तुमने देखा तक नहीं। तुम्हारे प्रॉक्सी लव को लेकर मैं कितना हंसी।
आपने ऐसा क्यों किया? मुझे बेवकूफ बनाने में मजा आता है। मैं ही मिली थी आपको? तुम जिस कदर दीवानी हो रही थीं, सब नहीं होते। मैं तुम्हें बेवकूफ बनाना जारी रखती, लेकिन तुमने बताया ट्रेनिंग के लिए इंदौर आओगी और मैं रहने की व्यवस्था करूं तो मुझे लगा मामला क्लियर कर देना चाहिए। वरना तुम संजोग के इश्क में मीरा बनी लोक लाज खोकर कुंज गलियों में भटकते हुए विजय नगर पहुंचो और संजोग तुम्हें पागल, बेवकूफ या सिरफिरी कह कर भगा दे तो तुम्हारी बुरी दशा होगी। बडे बाप के बेटे ऐसे ही सिरफिरे होते हैं। हर किसी को पागल या बेवकूफ कह कर पल्ला झाड लेते हैं। मैं तुमसे बोर भी होने लगी थी। कब तक टाइम पास करती? लेकिन आप में यह चालाकी आई कैसे? संजोग के कारण। इंदौर में पढती थी। संजोग मेरा क्लासमेट था। उसने मेरे इश्क का मजाक बनाया। रईस बाप का अकेला बेटा। मैं उसके नाम का इस्तेमाल करने लगी। आपका मकसद?
कुछ नहीं। मुझे सताया गया है। अब दूसरों को सताने में मुझे मजा आता है। तुम नहीं जानती प्रेम में चोट खाना कैसा आत्मघाती दर्द होता है। वही दर्द तुम्हारे चेहरे में है। लडकी के चेहरे में क्रांति-सी दिखाई दे रही थी। आप सिक हैं। आपको ट्रीटमेंट लेना चाहिए। लडकी हंसी, सिक! डॉक्टर कहते हैं, मैं सिजोफ्रेनिया की शिकार हूं, पर मैं नहीं मानती। होती तो तुम्हारी सतना सिटी में अकेले रहकर एक शो रूम में रिसेप्शनिस्ट न होती।
आप यहीं रहती हैं? अगर नहीं तो विजय नगर, इंदौर में? सुनो मैडम, इंदौर जाओ तो संजोग से बच कर रहना। मैं आपकी तरह सिक नहीं। हो, तभी इस वक्त यहां हो।
आपने मेरा भावनात्मक शोषण किया है, यह फिक्र है आपको? तो जाओ किसी विशेषज्ञ से साइबर कानून की जानकारी लो। मुझे सजा दिलाओ। लडकी लापरवाही दिखाते हुए चली गई। डेजी विश्वास नहीं कर पा रही थी। इंटरनेट की तिलिस्मी दुनिया में संबंधों की न महत्ता है, न गरिमा। यह कितना भयावह है कि अकेलेपन की शिकार, प्रेम में चोट खाई, सिजोफ्रेनिया से पीडित एक लडकी उसे सता रही थी और उसे नहीं मालूम इसे कैसे दंडित करे। काश! उसे फर्क करना आया होता कि संजोग लडका नहीं लडकी है, वह भी इतनी शातिर॥।

जागरण

1 comment:

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