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लालू का ब्लॉग शिकायतों से भरा

केंद्रीय रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव का ब्लॉग निश्चित तौर पर सभी का ध्यान आकर्षित करने वाला है लेकिन उनका यह ब्लॉग रेलवे का शिकायत बॉक्स ज्यादा लगता है। लालू यादव ने अपने ब्लॉग ‘डब्ल्यूडब्ल्यूडब्ल्यू डॉट माईपोपकोर्न डॉट कॉम’ पर पिछले नौ जून को महंगाई पर अपनी टिप्पणी पोस्ट की थी। उनके इस पोस्ट के जवाब में 68 लोगों ने अपनी प्रतिक्रिया भेजी है। लेकिन इन प्रतिक्रियाओं में महंगाई की चर्चा कम और रेलवे से जुड़ी शिकायतें ज्यादा हैं। लालू का ब्लॉग लोगों के लिए रेलवे से जुड़ी अपनी शिकयतें पहुंचाने का प्लेटफार्म बन गया है। कोई ट्रेनों में मिलने वाले भोजन, वहां की साफ सफाई और सुरक्षा से जुड़ी शिकायतें करता है तो कोई अपने क्षेत्र में नई ट्रेन चलाए जाने की मांग करता है। लालू ने अपने नए ब्लॉग में रेल मंत्री ने महंगाई को संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार की सबसे बड़ी चिंता बताया है। उन्होंने इसे दुर्भाग्यजनक लेकिन अनिवार्य बताया है। रेलवे को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने वाले लालू अपने ब्लॉग में कहते हैं कि बढ़ती महंगाई के बावजूद वह आम आदमी के लिए रेलवे को सुलभ बनाए रखेंगे। वे कहते हैं कि रेलवे की संचालन लागत में बढ़ोत्तरी हुई है लेकिन इसके बावजूद हमने रेलवे का किराया नहीं बढ़ाया, बल्कि इसे घटाया है। अपने ब्लॉग के माध्यम से उन्होंने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को कुछ सुझाव भी दिए हैं। शशांक त्रिवेदी जैसे कुछ लोग महंगाई बढ़ाए जाने की लालू की दलील से सहमत दिखाई पड़ते है तो कुमार कर्तव्यवीर जीत शरव नई दिल्ली और बिहार-झारखंड के बीच ट्रेन सेवा बढ़ाए जाने की बात करते हैं। इसी प्रकार ए. के. साहू उड़ीसा के लिए नई ट्रेन चाहते हैं। अविनाश कुमार दूबे की शिकायत ट्रेनों की आवाजाही में होने वाले विलंब को लेकर है।

1 comment:

Suresh Chandra Gupta said...

यह तो होना ही था. जब से लालू जी ने भारतीय रेल का कार्यभार संभाला है, यात्रियों की शिकायतों पर एक्शन होना बंद हो गया है. यात्री परेशान हैं कहाँ शिकायत करें, कोई सुनता नहीं, लिखित में शिकायत करो तो कोई जवाब नहीं देता. इसलिए जब लोगों को यह ब्लाग नजर आया उन्होंने अपनी शिकायतें यहाँ दर्ज करानी शुरू कर दीं. उन्हें इस से कोई मतलब नहीं की लालू जी अपने ब्लाग पर क्या कह रहे हैं. उनके लिए यह मात्र एक प्लेटफार्म है जहाँ वह शिकायत कर सकते हैं. और लालू जी को भी इस से कोई मतलब नजर नहीं आता कि लोग क्या कह रहे हैं. यह सब एक तमाशा है. अभी तक तो मेरा यही अनुभव है.