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पाक जेलों में प्रताड़ना से मरते हैं कैदी


पाकिस्तान की जेल में दस साल कैद काटने के बाद वतन लौटे रामप्रकाश की आपबीती भयावह है। रामप्रकाश को जासूसी के आरोप में जेल हुई थी। उन्हें गत एक जुलाई को रिहा किया गया था, लेकिन उनकी वतन वापसी सोमवार को संभव हो सकी। जेल में दी गई प्रताड़ना को रामप्रकाश भयावह बताते हैं। उनके मुताबिक एक साल तक तो जगह बदल-बदल कर लगातार यातना दी जाती रही। उन्होंने बताया कि जेल में करीब 25 ऐसे भारतीय कैदियों को देखा जो प्रताड़ित किए जाने के कारण अपनी सुध-बुध तक खो चुके थे। लगभग 30 भारतीय कैदियों की तो इन हालात में मौत हो चुकी है। जेलों में न तो अच्छा खाना दिया जाता है, न ही पीने को पानी और न ही इलाज की कोई सुविधा। रामप्रकाश ने सोमवार को वाघा बार्डर से पार होकर अपनी सरजमीं पर कदम रख ही दिए। रामप्रकाश जम्मू-कश्मीर के तवी जिले के रहने वाला है। सीमा पर रामप्रकाश के बेटे दीपक ने अपने पिता का गर्मजोशी से स्वागत किया। करीब दस साल पहले रामप्रकाश को सियालकोट से खुफियागिरी के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। 1 जुलाई को सजा की मियाद खत्म होने पर उसे कोट लखपत जेल से रिहा कर दिया गया। वाघा बार्डर पर पाकिस्तान टीवी को दिए साक्षात्कार में रामप्रकाश ने बताया कि 1997 में उसे पाकिस्तान से शराब की तस्करी कर भारत में दाखिल होने की कोशिश करते हुए गिरफ्तार कर लिया गया था। उसने अपने ऊपर लगाए जासूसी के आरोपों को गलत बताया।

जागरण

1 comment:

Umra Quaidi said...

लेखन के लिये “उम्र कैदी” की ओर से शुभकामनाएँ।

जीवन तो इंसान ही नहीं, बल्कि सभी जीव जीते हैं, लेकिन इस समाज में व्याप्त भ्रष्टाचार, मनमानी और भेदभावपूर्ण व्यवस्था के चलते कुछ लोगों के लिये मानव जीवन ही अभिशाप बन जाता है। अपना घर जेल से भी बुरी जगह बन जाता है। जिसके चलते अनेक लोग मजबूर होकर अपराधी भी बन जाते है। मैंने ऐसे लोगों को अपराधी बनते देखा है। मैंने अपराधी नहीं बनने का मार्ग चुना। मेरा निर्णय कितना सही या गलत था, ये तो पाठकों को तय करना है, लेकिन जो कुछ मैं पिछले तीन दशक से आज तक झेलता रहा हूँ, सह रहा हूँ और सहते रहने को विवश हूँ। उसके लिए कौन जिम्मेदार है? यह आप अर्थात समाज को तय करना है!

मैं यह जरूर जनता हूँ कि जब तक मुझ जैसे परिस्थितियों में फंसे समस्याग्रस्त लोगों को समाज के लोग अपने हाल पर छोडकर आगे बढते जायेंगे, समाज के हालात लगातार बिगडते ही जायेंगे। बल्कि हालात बिगडते जाने का यह भी एक बडा कारण है।

भगवान ना करे, लेकिन कल को आप या आपका कोई भी इस प्रकार के षडयन्त्र का कभी भी शिकार हो सकता है!

अत: यदि आपके पास केवल कुछ मिनट का समय हो तो कृपया मुझ "उम्र-कैदी" का निम्न ब्लॉग पढने का कष्ट करें हो सकता है कि आपके अनुभवों/विचारों से मुझे कोई दिशा मिल जाये या मेरा जीवन संघर्ष आपके या अन्य किसी के काम आ जाये! लेकिन मुझे दया या रहम या दिखावटी सहानुभूति की जरूरत नहीं है।

थोड़े से ज्ञान के आधार पर, यह ब्लॉग मैं खुद लिख रहा हूँ, इसे और अच्छा बनाने के लिए तथा अधिकतम पाठकों तक पहुँचाने के लिए तकनीकी जानकारी प्रदान करने वालों का आभारी रहूँगा।

http://umraquaidi.blogspot.com/

उक्त ब्लॉग पर आपकी एक सार्थक व मार्गदर्शक टिप्पणी की उम्मीद के साथ-आपका शुभचिन्तक
“उम्र कैदी”