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लालू का भर्ती बोर्डः जमीन दो-नौकरी लो

  • सुकेश रंजन
करीब साल भर पहले आईबीएन 7 को ये भनक मिली कि रेल मंत्री लालू प्रसाद के परिवार की मिल्कियत बढ़ती जा रही है। उनके खानदान के पास एक के बाद एक जमीन के टुकड़े आते जा रहे हैं। साल भर से आईबीएन 7 इस राज की तह तक पहुंचने में लगा था।
आईबीएन 7 की तफ्तीश में पता चला है कि उन्होंने लाखों की जमीन के बदले लोगों को रेलवे में नौकरियां दी हैं। आईबीएन 7 के पास उन तमाम जमीनों के पुख्ता कागजात हैं।
साथ ही ये भी अजब संयोग है कि उनकी पार्टी से केंद्र में मंत्री बने रघुनाथ झा और कांति सिंह ने भी मंत्री पद की शपथ लेने के आसपास ही लाखों की जायदाद लालू के परिवार वालों को भेंट कर दी।
लालू यादव पर आरोप है कि अगर रेलवे में नौकरी चाहिए तो मंत्री जी या उनके परिवार से संपर्क करना पड़ता है। ये वे लोग कह रहे हैं जिन्होंने अपनी जमीन लालू यादव और उनके परिवारवालों को दीं और एवज में उन्हें नौकरी मिली।
बिशुनदेव के परिवार में कई लोग हैं जिन्हें रेलवे में नौकरी मिल चुकी है। कई ऐसे हैं जिन्हें नौकरी मिलने का इंतजार है। स्टिंग ऑपरेशन में बिशुनदेव ने यह बात कही है। आईबीएन 7 के पास इस बात के दस्तावेजी सबूत भी हैं।
इसी प्रकार 5 फरवरी, 2008 को किशुनदेव ने अपनी जमीन का एक बड़ा टुकड़ा राबड़ी देवी को लिख दिया। कीमत लगाई गई चार लाख 21 हजार रुपए। वैसे इस रजिस्ट्री में इस बात का जिक्र नहीं है कि ये रकम राबड़ी देवी ने किशुनदेव राय को कैसे अदा की।
राबड़ी देवी ने जमीन लिखवाई हो या खरीदी हो...इतना तय है कि जिससे जमीन ली उसके परिवार में लोगों को नौकरी मिली। किशुनदेव राय के परिवार के ही संजय राय, धर्मेंद्र राय और रविंद्र राय ने भी अपनी जमीन पांच फरवरी 2008 को ही राबड़ी देवी के नाम लिख दी।
कीमत एक बार फिर वही चार लाख 21 हजार रुपए। इस बार भी रजिस्ट्री में भुगतान के तरीके का जिक्र नहीं है। आईबीएन 7 के पास मौजूद दस्तावेजों के मुताबिक 21 फरवरी, 2006 को मनोज कुमार, राजेश कुमार, विनोद कुमार, गोपी कृष्ण, सुशीला देवी ने करीब ढाई कट्ठा जमीन लालू यादव के बेटे तेजस्वी यादव के नाम लिखी। इस परिवार के एक सदस्य को भी रेलवे में नौकरी मिल चुकी है।
इसी तरह पटना के रहने वाले योगेन्द्र नारायण के बेटे को रेलवे में नौकरी मिल गई है। योगेंद्र ने 28 जनवरी 2008 को12061 वर्ग फीट जमीन ए के इंफो सिस्टम्स प्राइवेट लिमिटेड को बेची।
पटना से सटी इस जमीन को 17 लाख 60 हजार रुपए में बेचा गया। 28 जनवरी को ही योगेंद्र के भाई वीरेंद्र नारायण ने भी अपनी 5954 वर्ग फीट जमीन ए के इंफो सिस्टम्स प्राइवेट लिमिटेड को 8 लाख 60 हजार रुपए में बेच दी। वीरेंद्र के बेटे भी भारतीय रेल का हिस्सा बन चुके हैं।
रही बात ए के इंफो सिस्ट्मस प्राइवेट लिमिटेड की तो ये कंपनी दिल्ली में रजिस्टर्ड है और लालू यादव के दामाद शैलेष यादव इस कंपनी में पार्टनर हैं। नारायण भाइयों में से तीसरे राकेश ने भी जमीन का एक और बड़ा प्लॉट ए के इंफो सिस्ट्मस प्राइवेट लिमिटेड के नाम कर दिया है। क्या ये महज इत्तेफाक है।
आईबीएन-7

1 comment:

Sanjay Sharma said...

या कि पिछडों के मसीहा को बदनाम करने की साजिश है . ये भी तो हो सकता है अभी सारी को एक जगह जमा किया जा रहा हो ,बाद में भूमिहीनों में भूमि बांटकर बिनोबा बनाना चाहते हों जो अगले चुनाव में लालटेन की रोशनी वापस लाने में मदद करे .
और ये आई बी एन को क्या हो गया है देश के सारे चैनल जहाँ लेटा रहता है वहां ये जाकर खड़ा है . पिछले उ.प्र. के चुनाव में मुलायम की साइकिल पंचर करने का श्रेय इसी चैनल को जाता है .इसका मतलब ये तो नही हुआ कि लालू कि लालटेन इनके फूंक मारने से बुझ जायेगी. ध्यान रहे इसने लालटेन में बल्व फिट करवा लिया है .बिहार में लालटेन बुझता है तो दिल्ली में ट्यूब लाईट बखूबी जलता है .