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अब इंजेक्शन से नसबंदी

  • अविनाश बाकोलिया
परिवार नियोजन के लिए अब पुरूषों को ऑपरेशन जैसी जटिल प्रक्रिया से नहीं गुजरना होगा। सिर्फ एक इंजेक्शन से ही नसबंदी हो जाएगी। यह नई तरकीब ढंूढी है राजस्थान यूनिवर्सिटी एवं सवाईमानसिंह अस्पताल के प्रोफेसरों ने। गौरतलब है कि अभी तक भारत में पुरूष नसबंदी का औसत सिर्फ दो फीसदी है। इसके पीछे प्रमुख कारण शल्य क्रिया को लेकर लोगों के मन में बैठा भय बताया जाता है। मिनिस्ट्री ऑफ हेल्थ एंड फैमिली वेलफेयर एवं इंडियन कौंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च की ओर से पुरूषों के लिए ऑपरेशन के अलावा अन्य विकल्पों को तलाशने के तहत यह जिम्मेदारी राजस्थान यूनिवर्सिटी के प्राणिशास्त्र विभाग के प्रो। एन.के. लोहिया व एसएमएस के यूरोलॉजी विभाग के विभागाघ्यक्ष प्रो. टी.सी. सदासुखी व एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. राजीव माथुर को सौंपी गई। रिसर्च के जरिए इन्होंने "रीसूग" नामक इंजेक्शन इजाद किया। इस इंजेक्शन का एक साल से फेज-तीन क्लीनिकल ट्रायल चल रहा है। इसके तहत अब तक आठ लोगों को इंजेक्शन लगाया जा चुका है। इसका परिणाम सार्थक रहा। अभी यह प्रयोग करीब दो साल चलेगा।
इस प्रक्रिया में स्टाइरिन मैलिक एनहाइड्राइड (एसएमए) नामक एक को-पोलीमॉर को डायमिथाइल सल्फो-ऑक्साइड (डीएमएसओ) में मिलाकर 6 0 मिलीग्राम की मात्रा में दोनों शुक्राणु नलिकाओं में इंजेक्शन दिया जाता है। इस इंजेक्शन का नाम रीसूग दिया गया है। एक इंजेक्शन का असर करीब 10 वर्ष रहता है। इस दौरान पुरूष को परिवार नियोजन के किसी भी प्रकार के संसाधन अपनाने की जरूरत नहीं पड़ती।
रीसूग इंजेक्शन से शुक्राणु नलिका बाधित हो जाती है। एसएमए से पीएच (हाइड्रोजन ऑयन कंसनटे्रशन) कम हो जाता है। इससे शुक्राणु की मेम्बरेन (बाह्य झिल्ली) डैमेज हो जाती है। इसके चलते शुक्राणु की प्रजनन क्षमता खत्म हो जाती है।
पत्रिका से साभार

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