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अम्मा इज्जत तोप दो

  • नवीन पाण्डेय
हरिद्वार। '..हम लोगों के देश में बाढ़ आई गई हाय, बाढ़ में सब दहई गया है, अम्मा, बहन, भईया हमार इज्जत तोप दो, साड़ी, बर्तन, कपड़ा दइ द।' यह वेदना उस महिला की है जो बिहार की बाढ़ में अपना मकान, सामान व पशु सब कुछ खो चुकी है। नाते और रिश्तेदार से बिछड़ चुकी है। दाने-दाने को मोहताज हो गई है।
कहीं पनाह नहीं मिली तब 20 लोगों के कुनबे को लेकर वह मां गंगा की नगरी पहुंच गई। घर-घर घूम कर वह बिहार की बाढ़ में सब कुछ बह जाने की बात कहकर फूट-फूट कर रोती है और तन ढकने को कपड़ा और भोजन बनाने को बर्तन मांगती है। कुछ का दिल पसीजता है तो वे साड़ी-बर्तन दे देते हैं, जबकि बहुत उसकी आवाज को सुनते तक नहीं।
बिहार की बाढ़ अब राष्ट्रीय आपदा घोषित हो चुकी है। निश्चित रूप से बिहार की तस्वीर देख रूह कांप जाती है। सभी के मुंह से यही निकलता है, ऐसी आपदा कहीं न आए।
बिहार के पूर्णिया जो सबसे ज्यादा बाढ़ प्रभावित क्षेत्र है से फुलझरी नाम की महिला ट्रक से दो दिन का सफर तय कर अपने घरवालों और पड़ोसियों को लेकर हरिद्वार पहुंची हैं। फुलझरी ज्वालापुर की लाल मंदिर कालोनी के एक मकान की दहलीज पर फूट-फूटकर रोती है। कालोनी वालों से कपड़ा, बर्तन, खाने को अनाज मांगती है। अम्मा, बहन व भाई का हवाला देती है। फुलझारी बिहार के हालात के बारे में बार-बार कहती है 'हम लोग के देश में बाढ़ आई गई हय, बाढ़ में सब दहइ गई ह' और फिर फूट-फूटकर रोने लगती है। रोते हुए कहती है कई दिन हो चुका है, पेट भर खाना नहीं मिला। रिश्तेदार व नातेदार कहां है, उसे कुछ पता नहीं। घर और मवेशी बाढ़ की भेंट चढ़ चुके हैं। हरिद्वार में उसके प्रदेश के लोग हैं, उनके सहारे वह यहां पहुंचे हैं। अब घर-घर घूमकर बर्तन, साड़ी, कपड़ा मांग रहे हैं, जिससे गुजर बसर चल सके।
बाढ़ ने मीना को अपनों से किया अलग
सहरसा [बिहार]।
कोसी नदी में आई बाढ़ में फुलझारी की तरह ही मीना देवी ने भी अपना सबकुछ खो दिया है। वे अपने पति और दो बच्चों से बिछुड़ गई हैं। नदी की तेज धार में उनका घर, कई पालतू जानवर व अनाज की बोरियां बह गई हैं, लेकिन उनकी आंखें अब भी अपने पति और बच्चों की राह तक रही हैं।
अपनी बेटी और अन्य ग्रामीणों के साथ गत पांच दिनों से शहर के एक राहत शिविर में रह रही मीना ने कहा कि मेरी नींद उड़ गई हैं और भूख समाप्त हो गई है। फिलहाल मैं पानी पीकर दिन गुजार रही हूं और अपने पति व बच्चों के सुरक्षित रहने की प्रार्थना करती रहती हूं। मीना लगातार जिले के अधिकारियों से अपने पति और बच्चों का पता लगाने की गुहार कर रही हैं।
उन्होंने कहा कि हम लोग यहां सुरक्षित पहुंच गए है, लेकिन मैं अपने पति और बच्चों को लेकर चिंतित हूं, जो बाढ़ आने से ठीक एक दिन पहले अपने रिश्तेदार के यहां एक समारोह में भाग लेने गए थे। उल्लेखनीय है कि राज्य में आई बाढ़ से 14 जिलों के करीब 20 लाख प्रभावित हुए है।
जागरण

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