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वेतन बढ़े, निजाम भी तो सुघरे

  • जयंतीलाल भंडारी
एक सितम्बर से देश के 55 लाख से अधिक केंद्रीय कर्मचारियों को छठे वेतन आयोग के अनुरूप बढ़ा हुआ वेतन मिलना शुरू हो जाएगा। पिछले दिनों केंद्र सरकार ने छठे वेतन आयोग की सिफारिशों को स्वीकृत करके केंद्रीय कर्मचारियों की तनख्वाह में औसतन 21 फीसदी बढ़ोतरी करने की मंजूरी दी हैै। वेतनमान में बढ़ोतरी के बाद पहले साल में केंद्र सरकार पर 30 हजार करोड़ रूपए का बोझ पड़ेगा। सरकारी कर्मचारी कई वर्षो से यह मांग करते रहे थे कि निजी क्षेत्र की तुलना में उनका वेतन बेहद कम है और इस असमानता को दूर किया जाना चाहिए।केंद्र सरकार के द्वारा छठे वेतन आयोग को लागू किए जाने के बाद अब राज्य सरकारों पर भी नए वेतनमान लागू करने का दबाव बढ़ गया है। सामान्यतया राज्य सरकारें केंद्रीय वेतन आयोग की सिफारिशों के आधार पर कर्मचारियों का वेतन तय करती हंै। चूंकि निकट भविष्य में कई राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं और अगले साल लोकसभा चुनाव भी है। राज्य सरकारें भी अपने कर्मचारियों को वेतन वृद्धि का तोहफा देने की कवायद में जुट गई हैं। उत्तरप्रदेश की मायावती सरकार ने नए वेतनमान का ऎलान भी कर दिया है। यद्यपि एक दशक पहले पांचवें वेतन आयोग की सिफारिशों को लागू करते समय गरीब राज्यों की वित्तीय स्थिति पर प्रतिकूल असर पड़ा था। कई राज्यों ने वित्तीय अनुकूलता न होने के कारण बकाया राशि का नकद भुगतान न कर, उसे भविष्य निधि कोष में जमा कराया था, इससे गरीब राज्यों की वित्तीय स्थिति पर तत्काल बोझ नहीं पड़ा था। इस बार भी जिन राज्यों की वित्तीय स्थिति सुदृढ़ नहीं है, वहां वेतन वृद्धि का असर ज्यादा तकलीफदेह दिखाई देगा।बहरहाल नए वेतनमान से केंद्र सरकार के कर्मचारियों की मुरादें पूरी हुई हैं। अब कई कर्मचारी नए वेतनमान से लाभ-हानि के गुणा-भाग में भी लग गए हैं। वे मालूम कर रहे हैं कि उन्हें और अन्य वर्गो के कर्मचारियों को कितना लाभ हुआ है। वे विचार कर रहे हैं कि सरकारी क्षेत्र के विभिन्न स्तरीय अधिकारियों के मघ्य वेतन की असमानता कितनी है और साथ ही उनके हिस्से आने वाला वेतन निजी क्षेत्र के कर्मचारियों के मुकाबले में कितना है। कर्मचारियों के द्वारा यह विश्लेषण किया जा रहा है कि निम्न और उच्च पदों पर काम करने वाले कर्मचारियों का वेतन अंतर और कितना बढ़ गया है। यह देखा जा रहा है कि संशोधित वेतन से सचिव स्तर के कर्मचारियों को जहां 90,000 रूपए मासिक वेतन मिलेगा, वहीं सबसे निचले तबके के कर्मचारियों को 10,000 रूपए मासिक वेतन मिलेगा। यह भी विश्लेषण हो रहा हैै कि निजी क्षेत्रों में सीईओ और प्रशासनिक स्तर के अधिकारियों का जो वेतन सरकारी अधिकारियों के मुकाबले पहले कितना ज्यादा था और नए वेतनमान के बाद भी क्या यह अंतर बना हुआ हैक् यह विश्लेषण उभरकर सामने आ रहे हैं कि निजी क्षेत्र में नए उच्च अधिकारियों को शुरूआत में ही जहां 1 लाख से अधिक रूपए तक मासिक तनख्वाह मिलती हैै, वहीं छठे वेतनमान के तहत सरकारी कर्मचारी लम्बे अनुभव के बाद भी इस आंकड़े तक नहीं पहुंच पा रहे हैं। विश्लेषण किया जा रहा है कि मघ्यम दर्जे के सरकारी और निजी क्षेत्र के कर्मचारियों के बीच छठे वेतन आयोग के वेतनमान में जरूर समानता होगी। विश्लेषण किया जा रहा है कि छठे वेतन आयोग के तहत सरकारी कर्मचारियों को 2।5 से 3 फीसदी सालाना वेतनवृद्धि प्राप्त होगी, जबकि निजी क्षेत्र में वेतनवृद्धि का आंकड़ा वैश्विक मंदी के दौर में भी 10 से 20 फीसदी के मघ्य हैै। अनुभव किया जा रहा है कि आईटी, कम्प्यूटर, बैंकिंग, वित्त तथा सेवा क्षेत्र की कम्पनियों के कर्मचारियों को बहुत वेतन मिल रहा है। उन्हेें और अधिक वेतन मिल रहा है जो एकदम नई उम्र के हैैं और अच्छे शैक्षणिक संस्थानों से ऊंची गुणवत्ता डिग्रियां लेकर निकले हैैं। दूसरी ओर अर्थ विशेषज्ञों का कहना है कि सरकारी नौकरी वेतन में निजी क्षेत्र की तुलना में कुछ कमजोर क्यों न हो, मगर वह कई दृष्टिकोणों से निजी क्षेत्र से बेहतर ही रहेेगी। सरकारी नौकरी में वेतन के साथ मिलने वाले अन्य लाभ बेहतर होते हैैं और उनकी उपयोगिता निजी क्षेत्र के मुकाबले अधिक होती हैै। अन्य लाभों में पेंशन, जॉब सुरक्षा तथा तनाव रहित कार्य स्थितियां प्रमुख रूप से गिनाई जा सकती हैं। कारपोरेेट अधिकारियों के बीच कराए गए एक नवीनतम सर्वेक्षण से भी इसकी पुष्टि होती है। सर्वेक्षण में यह सामने आया है कि प्रतिभाशाली लोग अब भी सरकारी प्रशासनिक सेवाओं में जाना ज्यादा पसंद करते हैैं। निजी क्षेत्र में जितना वेतन दिया जाता हैै उसका परिणाम मिल जाता है, लेकिन सरकारी क्षेत्र में भारी-भरकर वेतन और अन्य सुविधाओं का उपयुक्त परिणाम नहीं मिल पाता हैै। सरकारी क्षेत्र में निजी क्षेत्र के कर्मचारियों की तुलना में कर्मचारियों की उत्पादकता कम हैै और उनमें नए आर्थिक दौर के अनुरूप प्रतिस्पर्धा की दौड़ में कार्य करने के लिए पहल क्षमता और उत्साह का अभाव हैै। सरकारी क्षेत्र अब भी वैश्वीकरण की चुनौतियों को समझ नहीं पाया हैै। सरकारी क्षेत्र में कदम-कदम पर भ्रष्टाचार है। पिछले दिनों ट्रांसपेरेेंसी इंटरनेशनल और सेंटर फॉर मैनेजमेंट स्ट्डीज द्वारा भारत में भ्रष्टाचार पर तैयार की गई रिपोर्ट में कहा गया हैै कि देश में भ्रष्टाचार खतरनाक स्तर पर है। देश के लगभग सभी सरकारी विभागों में रिश्वत ली जाती है। स्थिति इतनी चिंताजनक है कि देश में अमीर एवं मघ्यम वर्ग को ही नहीं गरीब आदमी को भी बुनियादी सेवाएं हासिल करने के लिए सरकारी विभागों के अधिकारियों व कर्मचारियों की आए दिन मुटी गर्म करनी पड़ती है। अब छठे वेतन आयोग ने कार्य संस्कृति, समयबद्धता, अनुशासन, कर्मचारियों की संख्या व खर्च में कटौती, कागजी कार्यो में कमी, अल्पावधि जांच, अनुबंधित सेवा, कार्यकुशलता आधारित पदोन्नति और लेटलतीफ कर्मचारियों पर निगरानी आदि पर जो सिफारिशें दी हैं, वेतन बढ़ाने के साथ इनका परिपालन जरूरी किया जाए। सरकार को अब सरकारी कर्मचारियों के कार्यो की जवाबदेही की रू परेखा बनानी होगी। यदि कल तक यह कहा जाता रहा है कि कम वेतन पर भ्रष्टाचार पनपता है तो अब नए समुचित वेतन पर जवाबदेही भी स्पष्ट रूप से निर्धारित होनी चाहिए। चूंकि केंद्र सरकार ने केंद्रीय कर्मचारियों को छठे वेतन आयोग के माघ्यम से अच्छे वेतन दिए हैं। अतएव देश के करोड़ों लोग सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों से भ्रष्टाचार रहित कर्तव्य परायणता और कार्यकुशलता की उम्मीदें कर रहे हैं। इसलिए सभी केंद्रीय अधिकारियों और कर्मचारियों को इस बात को घ्यान में रखना होगा कि वैश्विक गांव बन गई नई दुनिया के आर्थिक परिवेश में भारत को आगे बढ़ाने के लिए नई कार्य संस्कृति को अपनाएंगे। हम आशा करें कि देश का सरकारी क्षेत्र नए वेतनमान की खुशियों के साथ निजी क्षेत्र की तरह उत्पादकता, गुणवत्ता और कामयाबी का परचम लहराएगा।
[लेखक ख्यात अर्थशास्त्री हैं]
पत्रिका से साभार

3 comments:

अनुनाद सिंह said...

वेतन बढाने से भ्रष्टाचार कम होने की कोई सम्भावना नहीं है। भ्रष्टाचार को मिटाने के लिये क्रान्तिकारी कदम उठाने होंगे जिसे कोई 'अवतारी' नेता ही कर पायेगा। इसके लिये आर्थिक भ्रष्ट आचरण के लिये भारतीय दण्ड संहिता में प्रभावी सजा की व्यवस्था होनी चाहिये जो आज बिल्कुल नहीं है। यहाँ तक कि भ्रष्टाचारी के लिये आजीवन कारावास तक की सजा होनी चाहिये। यह भी नही भूलना चाहिये कि आर्थिक भ्रष्टाचार अन्य अपराधों की जननी है।

COMMON MAN said...

bhrastachar ki gangotri oopar se niiche ki taraf bahati hai. chara kaand ke abhiyukt khule ghoomenge to neeche waale bhi joothan uthanyege hi.

COMMON MAN said...

2 rupaye ki cheez 20 me bechna, 15 laakh me flat, engineering medical me admission ke liye 5-20 lakh, icu ka kharcha 5000 rupaye roj ye to govt.prayojit bhrastachar hai.