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बिना आईडी प्रूफ के नहीं होगा रेलवे रिजर्वेशन

  • पूनम गौड़
अगर आप रेलवे में आरक्षण कराने जा रहे हैं, तो आपके पास पहचान पत्र या फोन नंबर होना चाहिए। बिना आईडी प्रूफ के रेलवे आपको रिजर्वेशन नहीं देगी। रेलवे ने यह कदम सुरक्षा के मद्देनजर उठाया है। उत्तर रेलवे के डिविजनल रेलवे मैनिजर राकेश सक्सेना का कहना है कि यात्री अब आरक्षण फॉर्म पर अपना फोन नंबर देंगे। इसके न होने पर फोटो पहचान पत्र दिखाकर आरक्षण करवाया जा सकता है। रेलवे अधिकारियों के अनुसार इसके कई लाभ होंगे। एक तो यह कि हादसे के समय व्यक्ति की पहचान आसानी से हो सकेगी और क्लेम देने में भी परेशानी नहीं आएगी। दूसरा कोई भी व्यक्ति गलत इरादों के साथ आरक्षण नहीं करवा पाएगा और तीसरा रेलवे टिकटों की कालाबाजारी कम हो सकेगी। उत्तर रेलवे के सभी आरक्षण केंद्रों को यह आदेश जारी कर दिए हैं। इंडियन रेलवे आतंकवादियों के निशाने पर है। खुफिया एजंसियों ने रेलवे को चेतावनी दी है कि आतंकी व पाकिस्तानी खुफिया एजंसी आईएसआई के एजंट देश में रेलवे के माध्यम से ही मूवमंट कर रहे हैं। इसके चलते अब रेलवे ने रिजर्वेशन सिस्टम में व्यापक सुधार करने की दिशा में कदम उठाएं हैं। रेलवे रिजर्वेशन के लिए आईडी को अनिवार्य कर दिया गया है। रेलवे के नए नियमों के मुताबिक आरक्षण करवाने से पूर्व आपको अपना लैंडलाइन या मोबाइल नंबर फॉर्म पर लिखना होगा। इसके अभाव में आपको अपना कोई भी आईडी प्रूफ दिखाना होगा। इसके बिना आपको आरक्षण मिले, ऐसी गारंटी नहीं है। रेलवे की माने तो फोन नंबर वेरिफिकेशन के बाद ही जारी किए जाते हैं इसलिए व्यक्ति के नंबर से उस तक पहुंचा जा सकता है। अभी तक बिना किसी औपचारिकताओं और पूछताछ के रेलवे आरक्षण लोगों को उपलब्ध हो जाते थे। जिसकी वजह से असामाजिक तत्व और आतंकवादियों के मद्देनजर रेलवे को सुरक्षित माध्यम मानते थे। रेलवे सूत्रों के अनुसार आईबी के मुताबिक आतंकी और आईएसआई रेलवे में सफर को सबसे सुरक्षित मानते हैं। ऐसे में अब रेलवे ने भी इन नई चुनौती से निपटने के लिए नियमों में बदलाव किए हैं। रेलवे का दावा है कि ऐसा सिर्फ सुरक्षा कारणों से नहीं बल्कि यात्रियों की सहूलियत के लिए भी किया जा रहा है। पिछले साल भी फेस्टिवल सीजन से पहले रेलवे ने आरक्षण करवाने वालों की जांच के लिए मुहिम छेड़ी थी। उस समय रेलवे ने आरक्षण फार्म में दर्ज पतों की जांच की थी, लेकिन इतनी बड़ी संख्या में पतों की जांच करना रेलवे के लिए टेढ़ी खीर साबित हुआ। अब बदलावों के तौर पर टेलिफोन नंबर या फोटो आई कार्ड को अनिवार्य किया गया है। इस योजना का एक मकसद दलालों पर लगाम कसना भी है। सूत्रों के अनुसार फेस्टिवल सीजन में विभिन्न जगहों की आरक्षित टिकटों के लिए यात्रियों में मारामारी रहती है। ऐसे में रेलवे दलाल भी सक्रिय हो जाते हैं। पूर्व में ऐसे कई खुलासे हो भी चुके हैं, जब आतंकी ट्रेनों में आवागमन करते हैं।
क्या होंगे पेच
भारतीय रेल में बड़ी आबादी ऐसी है, जिनके पास न तो फोन है ,और न ही वोटर आई कार्ड हैं। ऐसे लोग अपना आरक्षण कैसे करवाएंगे, इस बारे में रेलवे अभी तक कुछ ठोस रणनीति नहीं बना पाई है। वोटर आई कार्ड फिलहाल लोगों की पहुंच से दूर है। रेलवे डीआरएम राकेश सक्सेना का कहना है कि पहचान पत्र परिवार के किसी भी सदस्य का चल सकता है। मसलन यदि पत्नी को सफर करना है, तो वह अपने पति का पहचान पत्र दिखा सकती है। इसके साथ उसे अपनी जॉइंट फोटो दिखानी होगी। इसी तरह बच्चे भी अभिभावकों का पहचान पत्र दिखा सकते हैं। वह कहते हैं कि राशन कार्ड, ग्राम पंचायत से लिखा हुआ पत्र या फिर कंपनी के लेटर हेड पर लिखा हुआ स्टांप पेपर, रेजिडेंट वेलफेयर असोसिएशन का पत्र, स्कूल के पहचान पत्र या लिखित पत्र आरक्षण के लिए मान्य होंगे।
नवभारत टाइम्स

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