Monday

कभी तो मिलते अकेले में

  • मंतोष कुमार सिंह
दिल के अरमान, दिल में दफन हो गए
उनसे मिले बरसो हो गए
कभी तो मिलते अकेले में
बाते करते अकेले में
मेरे आंसुओं पर अब तरस नहीं आती
उनको कभी मेरी याद नहीं आती
कभी तो याद करते अकेले में
बाते करते अकेले में

5 comments:

Mrinal said...

सुंदर रचना.

रंजन राजन said...

आपके ब्लाग पर आना अच्छा लगा। आपकी लेखन शैली प्रभावी है। सक्रियता बनाए रखें। शुभकामनाएं।
कभी फुरसत हो तो मेरे चिट्ठे पर भी एक नजर डालने का कष्ट करें।
www.gustakhimaaph.blogspot.com

कामोद Kaamod said...

वाह वाह..
बहुत सुन्दर.

pallavi trivedi said...

sundar....

kamlesh said...

bahut khub