Thursday

कोई लौटा दे सिमरन के बीते हुए दिन...


हर बार की तरह इस बार फिर धमाके हुए। दो दिन बीते नहीं की हम उसे भूलने लगे। लेकिन एक मासूम की दास्तां आपको ये धमाके भूलने नहीं देगा।ये दास्तां है बेटी सिमरन की। दिल्ली बम धमाके में सिमरन के साथ जो हुआ भगवान न करे किसी के साथ हो। छोटी सी बच्ची ने धमाके में अपने पिता, दादा और बुआ को खो दिया। उसकी मां अस्पताल में भर्ती है। अब हालत ये है कि सिमरन बुखार से तड़प रही है।।न कुछ खाती है,ना पीती है।

अब तो लगता है कुदरत भी सिमरन पर तरस नहीं खा रही। बारिश की वजह से सिमरन का घर उजड़ गया है और वो तेज बुखार में फुटपाथ पर रह रही है।

गफ्फार मार्केट में हुए बम धमाके ने सिमरन की हंसी छीन ली। पिता छीन लिया, दादा का प्यार छीन लिया और बूआ की पुचकार छीन ली। औऱ अब सिमरन को तो मां की गोद भी नसीब नहीं।

धमाके में घायल होने की वजह से मां अस्पताल में है।.अब तो सिमरन की हालत इतनी दर्दनाक हो गई है कि उसके सिर पर छत तक मयस्सर नहीं। पहले धमाके की वजह से सब कुछ तहस-नहस हो गया और अब बारिश ने अपना कहर ढाना शुरू कर दिया है। बंजारा परिवार सड़क के किनारे पेड़ के नीच रहता था। लेकिन अब बारिश की वजह से अब खुले आसमान के नीचे फुटपाथ पर रहने को मजबूर है।

सिमरन की आंखे जब भी खुलती हैं तो अपने पापा को ढूंढ़ती है। अपने दादा और बूआ की पुकार सुनने को बेताब रहती है। पता नहीं उसे ये अंदाजा भी है या नहीं कि इनमें से अब कोई नहीं आएगा। सिमरन की मां ने जब अपनी बेटी की हालत के बारे में सुना तो वो रह न सकी। बेटी फुटपाथ पर बुखार में तड़पती रही और वो अस्पताल के बिस्तर पर अपना इलाज करवाए। मां का दिल तड़प उठा। अपना इलाज अधूरा छोड़कर वो बेटी के पास चली गई।

लेकिन मां-बेटी का मिलन ज्यादा वक्त तक नहीं हो सका। सड़क पर अपना आसरा बनाए सिमरन का परिवार बारिश की मार झेल नहीं पाया। मजबूरन कमलेश को वापस अस्पताल भेजना पडा। सिमरन तो मानो टूट ही गयी। बुधवार रात तक उसका बुखार चढ़ गया सिमरन का परिवार अपनी लाडली की मुस्कान वापस लाना चाहता है। लाखों जतन किए, लेकिन सिमरन तो गुमसुम है। ना कुछ खाती है और नी ही कुछ पीती है।सरकार ने तो ब्लास्ट पीड़ितों के लिए मुवाअवजे की घोषणा करके खानापूर्ति कर ली। लेकिन जो दर्द सिमरन और उस जैसे सैकड़ों लोग सह रहे हैं उसे कौन दूर करेगा?

आईबीएन-7

4 comments:

श्रीकांत पाराशर said...

Theek baat hai, bechari simran ka kya dosh ? Parijanon ko kho diya, maa se bichud gayee. Masumon ki peeda atankwadi samjhen tab baat bane. hamare home minister to aadmi ki rate ke hisab se muawaja ghosit karte hain. isse jyada kuchh bhi karne men ve saksham nahin hain.

रंजन राजन said...

दर्दनाक।
जो दर्द सिमरन और उस जैसे सैकड़ों लोग सह रहे हैं उसे कौन दूर करेगा?

rakhshanda said...

behad darnaak,

pallavi trivedi said...

sachmuch dardnaak aur afsosjanak....