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महिलाओं को सेना में स्थायी कमीशन

दर्पण में 23.4.08 को खबर प्रकाशिक की गई थी कि महिलाओं को मिलेगा स्थायी कमीशन! जिसपर 26.9.08 को मोहर लग गई पूरी खबर पढीए


सेना के तीनों प्रमुखों की समिति ने महिलाओं को फौज में स्थायी कमीशन देने की सिफारिश के बाद रक्षा मंत्री ए के एंटनी ने शुक्रवार को इस एतिहासिक फैसले पर मुहर लगा दी।

सैन्य प्रमुखों की समिति ने सशस्त्र बलों में शिक्षा और न्यायिक शाखा में महिलाओं को पुरुषों की तरह स्थायी कमीशन देने की सिफारिश की थी। हालांकि महिलाओं को अभी भी लड़ाकू भूमिका में नहीं रखा जाएगा।

रक्षा मंत्रालय की ओर से जारी विज्ञप्ति में इस फैसले की पुष्टि करते हुए बताया गया कि एंटनी ने इस फैसले पर अपनी मुहर लगा दी है। गौरतलब है कि अभी तक महिलाओं को सशस्त्र सेनाओं में अस्थायी तौर पर ही लिया जाता था और उनकी नौकरी 15 साल से कम होती है। इसी कारण महिला अधिकारियों को लेफ्टीनेंट कर्नल रैंक से ऊपर का दर्जा नहीं मिल पाता है।
रक्षा मंत्रालय के नियमों के तहत महिलाओं को स्थायी कमीशन देने के मुद्दे को कैबिनेट के पास ले जाने की आवश्यकता नहीं है और रक्षा मंत्रालय मंत्री के स्तर पर यह फैसला लेने के लिए सक्षम हैं। यह महत्वपूर्ण फैसला पिछले एक साल से लंबित था।

हाल ही में एंटनी ने संसद में कहा था कि इस मामले पर सक्रियता से विचार किया जा रहा है और लड़ाई के मोर्चे के अलावा महिलाओं को स्थायी कमीशन दिया जाएगा। इस फैसले के बाद राष्ट्रीय रक्षा अकादमी और भारतीय सैन्य अकादमी जैसे संस्थानों के द्वार भी महिलाओं के लिए खुल जाएंगे। लेकिन सूत्रों ने बताया कि इस निर्णय से मौजूदा शार्ट सर्विस कमीशन प्राप्त महिला अधिकारियों को लाभ नहीं होगा क्योंकि इससे अनेक तरह की जटिलताएं पैदा होने की संभावना है।

महिलाओं को स्थायी कमीशन के जरिये परिवहन विमान और हेलीकाप्टर तक के पायलट के तौर पर सैन्य बलों में नौकरी मिलती रही है। इसके अलावा मेडिकल, डेंटल और नर्सिग में उन्हें स्थायी कमीशन मिलता रहा है।

पुरुष वर्चस्व की मानसिकता के कारण महिलाओं को स्थायी कमीशन देने की यह सिफारिश काफी ना-नुकर के बाद शीर्ष तक पहुंची है। अलबत्ता अब भी ऐसे सैन्य अधिकारियों की कमी नहीं है जिनके गले महिलाओं को स्थायी कमीशन देने का निर्णय उतर नहीं पा रहा है।

1 comment:

MANVINDER BHIMBER said...

पुरुष वर्चस्व की मानसिकता के कारण महिलाओं को स्थायी कमीशन देने की यह सिफारिश काफी ना-नुकर के बाद शीर्ष तक पहुंची है। अलबत्ता अब भी ऐसे सैन्य अधिकारियों की कमी नहीं है जिनके गले महिलाओं को स्थायी कमीशन देने का निर्णय उतर नहीं पा रहा है।
khushi ki baat hai....kunthit mansikta waale to ho halla krenge hi