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शर्मा की शहादत का मजाक

राजधानी के जामिया नगर इलाके में बाटला हाउस में पिछले महीने हुए एनकाउंटर में शहीद हुए इंस्पेक्टर मोहन चंद शर्मा के परिवार वालों ने समाजवादी पार्टी (सपा) के महासचिव अमर सिंह की ओर से भेजी गई सहायता राशि को लेने से इनकार कर दिया है। शर्मा की शहादत पर उठाए गए सवालों से आहत परिवार ने अमर सिंह का 10 लाख रूपए के चेक को ठुकरा दिया है। मोहन चंद शर्मा की पत्नी माया शर्मा ने कहा कि यह उनके पति की शहादत का मजाक उडाने जैसी बात है।
एनकाउंटर में शर्मा की मौत के बाद अमर सिंह और जामा मस्जिद के शाही इमाम समेत कई नेताओं ने शर्मा के वहां जाने पर सवाल खडे किए थे। अमर सिंह ने कहा था कि "आखिर शर्मा वहां क्या करने गए थे।" उन्होंने इस मामले की न्यायिक जांच कराए जाने की भी मांग की थी।अमर सिंह के बयान से आहत माया शर्मा ने चेक को ठुकराते हुए कहा कि बेटे के गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती होने के बावजूद इंस्पेक्टर शर्मा देश के लिए जान देने चले गए। उन्होंने कहा कि "आखिर कितने लोग ऎसे हैं, जो घर में बूढे मां-बाप और अबोध बच्चों और पत्नी को छोडकर देश के लिए अपने प्राण न्यौछावर कर सकते हैं।" उल्लेखनीय है कि राजधानी में गत 13 मई को हुए पांच धमाकों के सिलसिले में आतंकियों को पकडने के दौरान बटाला हाउस में पुलिस और आतंककारियों के बीच हुई मुठभेड में इंस्पेक्टर शर्मा की मौत हो गई थी। इस एंकाउंटर में दो आतंककारी भी मारे गए थे। मुठभेड को लेकर कई सवाल खडे किए गए थे।

3 comments:

Arvind Mishra said...

शाबाश शर्मा परिवार -हर भारतीय यही आत्म सम्मान दिखाए तो टुच्ची राजनीति करने वालो की लुटिया डूब जाय !

डॉ .अनुराग said...

मूर्ख थे शर्मा ,जो इस देश पर शहीद हुए ,रिश्वत लेते ,ऐ.सी गाड़ी में घुमते ओर अपने बच्चो को डोनेशन देकर अच्छे कालेजो में भेजते ....
लेकिन उन्हें शहीद होने का शौक था वो भी ऐसे देश में जहाँ शाहदत पर सवाल वो उठाते है जिनका अपना कोई चरित्र नही है .तो क्या कल इस देश में भगत सिंह को सिख ,बोस को बंगाली का अश्फुल्लाह खान को मुसलमान बाँट लेगे ?क्या गांधी ओर आजाद पूरे देश के शहीद नही थे ?
क्या वास्तव में इस देश में नैतिक तौर पर इतना दिवालिया - पन आ गया है? क्या कारण है कि एक हम इतने असवेदंशील हो गये है ?क्या इस देश में अब राज ठाकरे ,अमर सिंह जैसे लोग कुछ भी बोलेगे ओर हम अनसुना कर देगे ?क्या अपने देश से प्यार भी अब अपराध है ?क्या अब लगता है आपको कोई पुलिस वाला हम आपके लिए लड़ने को तैयार होगा ?कम से कम ईमानदार लोगो को तो इस देश में चैन से मरने दो अगर जीने नही दे सकते !
मै शर्मसार हूँ की मै इस देश में पैदा हुआ जहाँ शहीदों की वक़्त नही है ....

एस. बी. सिंह said...

जनाब अमर सिंह साहब को इससे कोई शर्म नहीं आएगी।