Thursday

पागल बना देती है पायल

कभी पागल बना देती है पायल
कभी घायल कर देती है पायल
जो झनकती है कानों में
दिल में उतर जाती है
मेरी हसरत को
दिवाना बना देती है पायल
न सुनू खन से खनकना
तो सुकून नहीं मिलती
मेरी नजरों में हर पल
रुसवाई बन जाती है पायल
कभी पागल
कभी घायल
बना देती है पायल

मंतोष कुमार सिंह

3 comments:

सुशील कुमार छौक्कर said...

बहुत खूब लिखा है।

विवेक सिंह said...

बनाना ही चाहिए . पायल ने पागल न बनाया तो क्या किया ?

Ramesh Jagat said...

bhagwan aapko payal ka pagal bana de
is subh kamnao ke sath apka apna
dusra pagal