Wednesday

घृणा की राजनीति की बलि चढ़ा धर्मदेव

उत्तर प्रदेश के पिछड़े संतकबीर नगर जिले से रोजी रोटी की तलाश में मुम्बई गए धर्मदेव राय को क्या पता था कि वह घृणा की राजनीति की भेंट चढ़ेगा और दीपावली और छठ पर्व के लिये घर जाने निकले उस युवक की यात्रा श्मशान घाट पर खत्म होगी। तीन दिन पहले मुम्बई में कथित पुलिस मुठभेड़ में बिहार की राजधानी पटना के राहुल राज की मौत की हलचल खत्म भी नहीं हो पायी थी कि नवी मुम्बई के वाशी इलाके में रहने वाला धर्मदेव की पिटाई से हुई मौत से घृणा के भाव को कुछ और बढ़ा दिया। राहुल राज की कथित मुठभेड़ पर मुम्बई पुलिस ने अपना पीठ थपथपाई थी तथा महाराट्र के राजनीतिक दलों ने भी इसे सही कदम ठहराया था लेकिन अब धर्मदेव की हत्या के मामले में कोई भी कुछ बोलने को तैयार नहीं है। न तो मुम्बई पुलिस और न शिवसेना या महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना जैसे घृणा की राजनीति करने वाले दल। धर्मदेव मंगलवार को अपने घर आने के लिये ट्रेन पकडऩे लोकमान्य तिलक टॢमनस आ रहा था। मुम्बई की जीवन रेखा कही जाने वाली लोकल ट्रेन के जिस डिब्बे में वह सवार था उसमें कुछ ऐसे तत्व भी बैठे थे जो कुछ राजनीतिक दल और नेताओं के इशारे पर उत्तरभारतीयों को अपना दुश्मन मान रहे थे। बात-बात में उन सभी लोगों ने उसकी तथा उसके तीन और साथियों की पिटाई शुरू कर दी। धर्मदेव को इतना पीटा गया कि उसकी मौत हो गयी तथा उसके तीनों दोस्त बुरी तरह से जख्मी हो गये। दुखदायी तो यह था कि धर्मदेव के परिवार वालों को उसका शव देखना भी नसीब नहीं हुआ। उसके दोस्तों तथा कुछ और लोगों ने उसका कल मुम्बई में ही अंतिम संस्कार कर दिया। धर्मदेव के बड़े भाई ब्रहम्देव राय ने कहा कि उसके मौत की खबर आने के बाद मां बाप और उसकी पत्नी सन्न है। धर्मदेव की पत्नी दीपमाला की आंखों से तो आंसू रूकने का नाम ही नहीं ले रहे हैं। वह गर्भवती भी है। उन्होंनें कहा कि मेरे भाई की हत्या से मुम्बई में काम करने वाले उत्तर प्रदेश के लोगों में दहशत फैल गयी है और सब अपने आप को मौत के बीच घिरा पा रहे हैं। केन्द्र सरकार यह साफ करे कि वह क्या चाहती है। यदि वह मुम्बई में रहने वाले उत्तर भारतीयों की सुरक्षा नहीं कर सकती है तो मुम्बई समेत पूरे महाराष्ट्र में जाने वाले उत्तर भारतीयों पर प्रतिबंध लगा देना चाहिये। उन्होंनें कहा कि धर्मदेव के साथ जिन तीन लोगों की पिटाई की गयी वह सभी संतकबीर नगर जिले के ही रहने वाले हैं। धर्मदेव का अंतिम संस्कार भी उन तीनों ने अन्य लोगों की मदद से किया।

3 comments:

वेद रत्न शुक्ल said...

अब तो टिप्पणी भी नहीं लिखी जाती। हाथ और दिमाग ने जवाब दे दिया है। सचमुच मैं सन्न हूं... क्या होगा इस देश का?

Suresh Chandra Gupta said...

शर्म की बात है यह, मुंबई पुलिस, महा सरकार, शिव सेना, राज की सेना, मंबई के मराठा मानुसों के लिए. बिहार के नेताओं के लिए क्या कहा जाय, वह तो कुर्सी पर बैठे हैं केन्द्र में या राज्य में. अब एक धर्मदेव के लिए कुर्सी तो नहीं त्यागी जा सकती.

गिरीश बिल्लोरे "मुकुल" said...

मित्र
आपका आलेख मुझे दिशा दे गया मिसफिट पर मैंने इसे लिंक किया है
आपत्ति हो तो बताएं
अच्छे आलेख के लिए आभार