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Wednesday

शहादत पर सियासत उचित या अनुचित

मुम्बई में हुए आतंकी हमले में शहीद हुए एटीएस प्रमुख हेमंत करकरे की शहादत पर भी अब सियासत होने लगी है। केन्द्रीय अल्पसंख्यक मंत्री एआर अंतुले ने करकरे की मौत संदेह के घेरे में खड़ा कर दिया है। ऐसी गंदी राजनीति देश को कहा ले जाएगी। यह एक बहुत ही ज्वलंत विषय बनाता जा रहा है। इस पर आपकी क्या राय है। अपनी टिप्पणी से देश को अवगत कराएं।

1 comment:

वेद रत्न शुक्ल said...

मुम्बई पर हमला और मेरा रात्रि जागरण शीर्षक त्वरित टिप्पणी (bakaulbed.blogspot.com)में मैंने उसी दिन इसकी आशंका जता दी थी। गलती तो कांग्रेस की है जिसने इस प्रकार की राजनीति की और उसे भरपूर बढ़ावा दिया। अब उसके मन्त्री ऐसी गन्दी हरकत कर रहे हैं तो कांग्रेस मौन है- मौनम् स्वीकृति लक्षणम्। दरअसल छद्म धर्मनिर्पेक्षतावादी राजनीति यानी की तुष्टीकरण की राजनीति यानी कि साम्प्रदायिक राजनीति ही देश की सबसे बड़ी समस्या बन गयी है। हर भारतवासी को इससे सतर्क रहना होगा। लेकिन अफसोस कि ऐसा नहीं हो रहा है।