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तिल तिल कर मरा कर्ज के तले दबा किसान

छिंदवाड़ा जिले के ग्राम कचराम निवासी किसान श्याम यदुवंशी ने अपने खेत में कीटनाशक पीकर जान दे दी। किसान द्वारा आत्महत्या का मामला कोई सामान्य घटना नहीं है। जिन परिस्थितियों में किसान श्याम यदुवंशी ने आत्महत्या की वह दिल दहलाने वाली घटना है। श्याम को तिल-तिल मरने पर मजबूर किया गया। पहले बैंक के कर्मचारी और अधिकारी उसके घर गए, लोन की रकम चुकाने के लिए उस पर दबाव बनाया। तरह तरह की यातनाएं दी गईं। गांव वालों के सामने जलील किया गया। यहां तक बैंक अधिकारियों ने कह डाला कि अगर तुम लोन की रकम नहीं चुका सकते तो तुम्हें डूब मरना चाहिए। किसान श्याम यदुवंशी को यातनाएं देने का सिलसिला यहीं नहीं थमा। बिजली वितरण कंपनी के कर्मचारी बकाया बिजली बिल वसूले गए, किसान ने तुरंत बिजली बिल न दे पाने की असमर्थता जताई। बिजली वितरण कंपनी के अधिकारियों और कर्मचारियों द्वारा भी उसे परेशान किया गया। घर से समान उठा ले जाने की धमकी दी गई है। 300000 से अधिक कर्ज ले चुका किसान ऐसे में क्या करता है। उसे कहीं भी उम्मीद की किरण नजर नहीं आई। अगर कहीं से भी उसे जिंदगी की आस दिखाई देती तो आज श्याम हमारे बीच होता मरता नहीं। कीटनाशक पीने के बाद गंभीर अवस्था में किसान श्याम को जिला अस्पताल छिंदवाड़ा लाया गया। जिला अस्पताल में भी अगर समुचित इलाज मिल जाता तो उसकी जान बच जाती। डॉक्टर ने इलाज तो दूर उसे देखना भी मुनासिब नहीं समझा। नर्सों के भरोसे गंभीर किसान को छोड़ दिया गया। आखिरकार किसान जिंदगी की जंग हार गया और उसकी सांसे टूट गईं और वह हमेशा के लिए इस दुनिया से विदा हो गया। किसान के सामने 12 महीने विपरीत परिस्थितियां होती हैं। महंगे बीज, खाद और अन्य पदार्थ लेकर वह खेती करता है। प्राकृतिक आपदा और अन्य विपरीत परिस्थितियों के बावजूद फसल तैयार करता है। जब फसल पक कर तैयार हो जाती है तो उसका उचित दाम नहीं मिलता। कई बार तो फसल की लागत भी किसान को नहीं मिल पाती है। व्यापारी भी मौके का फायदा उठाते हैं। बड़े पैमाने पर उत्पाद होने के कारण फसल की अच्छी कीमत नहीं देते। ऐसे में किसान को अपनी फसल औने-पौने दाम बेचनी पड़ती है। ऐसे में केंद्र और राज्य सरकारों को किसानों के लिए दीर्घकालीन योजना बनानी पड़ेगी ताकि किसानों को उनकी फसल का उचित मूल्य मिल सके और वह भी आम लोगों की तरह जीवन जी सके।

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