Tuesday

सर्जिकल सदमा


पाकिस्तान के साथ-साथ भारत के कुछ नेताओं को भी सर्जिकल स्ट्राइक का सदमा लग गया है। वे 'कथित कोमाÓ में चले गए हैं। 'कथित कोमाÓ  से पीडि़त व्यक्ति को न देश दिखता है और न ही देशभक्ति। इस प्रकार की बीमारी राजनीति में ज्यादा पायी जाती है। ऐसे लोग अपनी जुबान पर लगाम नहीं लगा पाते हैं। सत्तापक्ष के सभी निर्णय में ये लोग कमियां निकालते हैं। कमियां न मिले तो शब्द प्रहार करते हैं। उरी हमले के बाद भारतीय सेना द्वारा पीओके में सर्जिकल स्ट्राइक की खिलाफत करना 'कथित कोमाÓ की देन है। तभी तो भारतीय सेना द्वारा की गई कार्रवाई के सबूत मांग रहे हैं। मुझे लग रहा है कि आज पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ काफी खुश हुए होंगे, चलो कोई तो साथ देने वाला मिला।

Monday

मेरे मौजूदगी 


मेरे मौजूदगी का
शब्द एहसास कराते हैं
मन की बात
कैनवास पर उतर आते हैं
चुप रहता हूं
कलम से बोल निकल जाते हैं
मेरे मौजूदगी का
शब्द एहसास कराते हैं

Friday

सूखने लगे कंठ
                                                                                   
छिंदवाड़ा जिले में अभी से सूखे की आहट सुनाई देने लगी है। गर्मी की शुरुआत के साथ ही लोगों के कंठ सूखने लगे हैं। कोयलांचल और संतरांचल के कई नगरीय और ग्रामीण क्षेत्रों में एक सप्ताह बाद पेयजल आपूर्ति हो रही है। यहां के निवासियों को प्रतिदिन पेयजल के लिए घंटों मशक्कत करनी पड़ रही है। ३८२ हैंडपम्पों में जल स्तर काफी गिर चुका है। ११९ हैंडपम्प सूख गए हैं। १८१ हैंडपम्प 'बीमारÓ हो चुके हैं। गांवों में ११० नल योजनाएं बंद पड़ी हैं। विभिन्न कारणों से १५१ बोरिंग बंद पड़े हैं। पांढुर्ना, सौंसर, परासिया व जुन्नारदेव के २८४ गांवों में भूमिगत जलस्तर औसत से छह मीटर तक नीचे चला गया है। दो-तीन माह बाद इन गांवों के हैंडपम्प और बोर पानी देना बंद कर देंगे। नदियों, जलाशयों, बांधों और पानी के अन्य स्रोत की स्थिति भी चिंताजनक है। जलस्रोत्रों में पर्याप्त जल संग्रह नहीं होने के कारण जलापूर्ति में व्यवधान उत्पन्न हो रहा है। जल संकट को देखते हुए जिले की सभी १३ तहसीलों में पेयजल सहेजने की कवायद शुरू हो गई है। कलेक्टर ने जलदोहन पर रोक लगा दिया है। मप्र पेयजल परिरक्षण अधिनियम १९८६ की धारा ३ के अंतर्गत सभी विकासखंडों को जल अभावग्रस्त घोषित कर दिया गया है। १५ जुलाई तक जिला उक्त आदेश की जद में रहेगा। पिछले मानसून में कम बारिश के कारण जल संकट की स्थिति निर्मित हुई है। भयावह स्थिति के मद्देनजर लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग ने सूखा राहत प्रकोष्ठ बना लिया है। ग्रामीण अंचलों में पेयजल निदान और पेयजल प्रदाय व्यवस्था सुचारू रखने के लिए विशेष तैयारियां की जा रही हंै। गर्मियों में हर साल जल संकट की स्थिति निर्मित होती है, लेकिन हम 'प्यास लगने पर कुआं खोदते हैं।Ó बारिश के मौसम में पानी संग्रहण के प्रयास नहीं किए जाते, जिसका खामियाजा गर्मी में भुगतना पड़ता है। सालभर पानी की समस्या उत्पन्न न हो इसके लिए मानसून के समय ही वर्षा जल के संरक्षण और संग्रहण पर बल देना होगा। सतही जल संरचनाओं का निर्माण कर भूमिगत जलस्तर बढ़ाना होगा। खेतों, मैदानों और गांवों में वर्षा जल के प्रवाह को नियंत्रित करना होगा। रेन-वाटर हार्वेस्टिंग की संरचनाओं का निर्माण कर बारिश के पानी को भविष्य के लिए सुरक्षित रखना होगा। हमें पानी के दुरुपयोग को रोकने की शुरुआत घर से करनी होगी। हम दिनभर में कई लीटर पानी व्यर्थ बहा देते हैं, इसे रोकना होगा। जलआपूर्ति की पुरानी पद्धति को बदलना होगा। नए सिरे से पाइप लाइन बिछानी होगी, क्योंकि लीकेज के कारण प्रतिदिन लाखों लीटर पानी बर्बाद हो जाता है। अब समय आ गया है, एक-एक बूंद पानी सहेजने का।

Wednesday

वरदान बना बेटियों के लिए अभिशाप




स्कूली शिक्षा के दौरान कई कक्षाओं तक परीक्षाओं में एक निबंध अक्सर लिखने के लिए कहा जाता था, जिसका शीर्षक था विज्ञान, वरदान या अभिशाप । उस समय की अपनी समझ के अनुसार पढक़र, रटकर निबंध लिख लिया करता था। अब जब गुम होती बेटियों और उसके कारणों के बारे में धरातल पर तस्वीर देखी, तब उस निबंध का मतलब और महत्व समझ में आ रहा है। अल्ट्रासाउन्ड सोनोग्राफी मशीन का अविष्कार कर चिकित्सा जगत और गर्भवती माताओं तथा उनके पेट में पलने वाले बच्चों को जिंदगी का वरदान देने वाले स्काटलैंड के प्रोफेसर डॉ. इयान डोनाल्ड यदि धोखे से भी इस मशीन के भविष्य में भयावह दुरूपयोग होने की कल्पना कर लेते तो शायद वह अपने अविष्कार को नष्ट कर देते। संभवत: वह कभी नहीं चाहते कि उनका दिया वरदान बेटियों की मौत का अभिशाप बने। इस तकनीक से गर्भावस्था और शिशु की स्थिति को देख पाना संभव हो गया था। द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान प्रसूति और गर्भस्थ शिशु के विकास के परीक्षण को लेकर प्रो. डोनाल्ड द्वारा विकसित अल्ट्रासाउन्ड सोनोग्राफी प्रणाली 1950 में दुनिया के सामने प्रकाश में आई, जब पेट के जानलेवा कैंसर से जूझती एक महिला का इस तकनीक से परीक्षण व अध्ययन करने के पश्चात उसकी क्षतिग्रस्त डिंब ग्रंथि को हटा दिया गया और महिला की जान बचा ली गई। उसके बाद उन्होंने एक बी-मोड अल्ट्रासाउन्ड स्कैनर का भी अविष्कार किया, जो जुड़वां गर्भावस्था का पता लगाने में सक्षम था। इस तकनीक के उपयोग से न सिर्फ बच्चे को देखा जा सकता है, बल्कि जन्म से पहले ही उसके लिंग का भी पता लगाया जा सकता है। यानी जन्म लेने वाला बच्चा लडक़ा है या लडक़ी , यह बात जन्म के कई महीने पहले ही ज्ञात हो सकती है। इस तकनीक की यही बात गर्भ में कई स्तरों पर बेटियों की जान की दुश्मन बन गई। कई दंपत्तियों में यह उत्सुकता रहती है कि शिशु का लिंग क्या है, लेकिन बात यहीं तक सीमित नहीं रहती कि लडक़ा पैदा होगा या लडक़ी । बड़ी संख्या में लोग लिंग परीक्षण करवाते ही इसीलिए हैं कि अगर गर्भ में कन्या भ्रूण पल रहा है, तो उसे जन्म लेने से पहले ही नष्ट करवा दिया जाए। हालांकि ंिलंग जांच के लिए कई तकनीक इस्तेमाल की जाती हैं। इनमें 1. एम्नियोर्सेटेसिस(गर्भ जल जांच तकनीक), 2. क्रोनिक बिल्लों बायोप्सी ( बीजाण्डासन की कोशिकाओं की जांच), 3अल्ट्रासोनोग्राफी ( ध्वनि तंरगों द्वारा की जाने वाली जांच , जिससे शरीर के अंदर की विकारों की तस्वीर देखी जाती है)। इनमें सर्वाधक प्रचलित तकनीक अल्ट्रासाउन्ड सोनोग्राफी है। 1980 के दशक की शुरूआत में अल्ट्रासाउन्ड से लिंग जांच करने वाली तकनीक की आसान पहुंच ने शिशु लिंग अनुपात की तीब गिरावट में अपना योगदान दिया है। लिंग जांच की एक और तकनीक की घुसपैठ पश्चिम मे ईजाद लिंग जांच की एक और तकनीक हिन्दुस्तान में कदम रख चुकी है। यह एक ऐसा जांंच उपकरण, जिसे कुरियर से बुलवा सकता है । कोई भी 30 से 35 हजार रूपए तक खर्च करके रक्त परीक्षण के माध्यम से जान सकता है कि महिला के गर्भ में बालक अथवा बालिका भ्रूण पल रहा है। इस आयातित उपकरण का पंजाब, हरियाणा जैसे सीमावर्ती राज्यों से देश में दाखिला हो चुका है और इस्तेमाल शुरू हो चुका है। मप्र में इंदौर में इस तकनीक से लिंग की जांच का दौर शुरू हो चुका है। अल्ट्रासाउन्ड सेंटर्स के संचालक इस तकनीक के आगमन की पुष्टि कर रहे हैं। जहां तक अल्ट्रासोनोग्राफी का सवाल है इस बारे में एक अभी तक यह धारणा पूरी तरह से स्पष्ट नहीं हो पाई है कि इसका इस्तेमाल कहां तक सुरक्षित है। हां, ये बात जरूर कही जाती है कि सोनोग्राफी सुविधा का इस्तेमाल नियमित रूप से नहीं करना चाहिए, इसे एक चिकित्सा विकल्प के रूप में ही अपनाया जाना चाहिए। हमने रीवा में कई अल्ट्रासोनोग्राफी सेंटर की पड़ताल के दौरान डाक्टरों से इस तकनीक के परिणामों के बारे में जानना चाहा तो कुछ विंदु सामने आये, उनमें एक तो यह कि इस तकनीक से किया की लिंग की जांच , इसकी कोई गारंटी नहीं है। गर्भवती स्त्री या गर्भस्थ शिशु के विकास एवं स्वास्थ्य पर इस तकनीक का कोई बुरा प्रभाव नहीं पड़ेगा, इस बात की भी सुनिश्चितता नहीं है। गर्भपात से लेकर कम बजन का बच्चा होने जैसी कोई घटना हो भी सकती है। भोपाल में कुछ दिन पहले बेटी बचाओ अभियान के तहत मुख्यमंत्री निवास में जमा हुए चिकित्सा विशेषज्ञों से हमारी चर्चा का यही निष्कर्ष निकला कि अभी तक सोनोग्राफी मशीन से गर्भवती या गर्भस्थ शिशु को होने वाले नफा नुकसान के बारे में कोई एक मत नहीं है।

सुनील कुमार गुप्ता

Saturday

कलयुगी द्रोपदी कहां जाए...

औरत पर जुल्म जारी है। द्वापर में पांडवों ने द्रोपदी को दांव पर लगाया था। वह सिलसिला शायद थमा नहीं है। उत्तर प्रदेश के मुज्जफरनगर के एक व्यक्ति ने अपनी पत्नी को जुए की भेंट चढा दिया। पत्नी को दांव पर लगाने वाले सोकेन्द्र कुमार को अपने दो मासूमों का भी ख्याल नहीं आया। उसकी पत्नी को इसका पता तब चला, जब बीते 19 दिसम्बर को चार लोग उसके घर आए। तब उसके पति ने कहा कि वह पत्नी को जुए में हार गया है। चारों लोग पीडिता को जबरन ले जाने लगे। महिला की चीख सुनकर पडोसियों ने बीच—बचाव किया। मामला बिगडते देख आरोपी भाग गए। लेकिन, उनके जाने के बाद सोकेन्द्र ने अपनी पत्नी को डांटा और कहा कि छोटी सी बात के लिए हंगामा नहीं करना चाहिए था।

थाना भवन के पुलिस अधिकारी विजय कु मार ने बताया कि पीडित महिला थाने आई थी। लेकिन, तफ्तीश के बाद केवल घरेलू विवाद की बात सामने आई और महिला वापस घर चली गई। जबकि, इलाके के लोगों का कहना है कि घटना के बाद से महिला गायब है। क्योंकि, उसे डर है कि अगर वह दोबारा दिखी तो जुए में जीते लोग उसके पति को पीटेंगे। कुछ पडोसियों को मालूम है कि वह कहां है। लेकिन, महिला को डर है कि उसके पति के दोस्त उसे अगवा कर लेंगे। उधर सुकेन्द्र की मां ने भी बेटे पर जुआरी और शराबी का आरोप लगाते हुए कहा कि उनके बेटे ने आजीविका का सहारा चार बीघा जमीन को बेच कर मिले पैसे जुए और शराब में उडा दिए। उसने घर के बर्तन भी बेच दिए।

पत्रिका से साभार